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"हैवान"

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सूरज हर रोज निकलता है, दिन हर रोज़ बदलते है, फूल फिर खिलते हैं और छोटी छोटी कालिया पत्तो को ओट से दुनिया देखने को बेताब सी झांका करती है... लेकीन उस आदमी का क्या जो वक्त की एक चुटकी मात्र से आपनी हैवानियत पर उतर आता है? होश में होकर भी बेहोश रहता है? और उन महिलाओं का क्या जो आए दिन घरेलू हिंसा का शिकार होती है? जुलाई का महीना मानसून ने समय से कुछ पहले दस्तक दे दी हैं, कुछ हो न हो प्यार करने और प्यार जताने का असली मौसम तो यही होता है, जब सावन दस्तक देने को तैयार हरियाली को अपनी बाहों में समेटे हुए कुछ दूरी पर आस की नज़रों से खड़ा हमारे साथ साथ मानसून का आनन्द ले रहा होता है। नीमा दिनभर की थकान के बाद भी अचानक हुई झमाझम बारिश का  लुत्फ रमेश के साथ उठाने के लिए किचन में पकौड़ियां छान रहीं थी। रमेश कुछ दिनों से उदास चल रहा है, तभी नीमा ने सोचा देश में तो लॉकडाउन है ही चलो दिल के रिश्तों को ही सुधार लिया जाए जो जिंदगी की भागदौड़ में कहीं खो गए थे। रमेश शाम के समय बालकनी में रक्खे झूले पर बैठा, कुछ सोच रहा था, ये वहीं झूला था जो सबसे पहले इस घर में आया था, नीमा की सैलरी से और यहां दोनों ...

"अंदाज़ ऐ जिंदगी"

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  एक अंजान शहर और उस शहर के अंजान लोग, बहुत मुश्किल होता है एक अंजान शहर के लोगों में घुलना - मिलना और उनके कल्चरल के साथ साथ अपने कल्चरल और अपनी बंदिशों को ध्यान में रखना लेकीन सपनों को पूरा करने के लिए इंसान क्या कुछ नही करता.... ये कहानी है एक छोटे से गांव से अपने बड़े सपनों को हकीकत बनाने आई तान्या की ... माता पिता बचपन में कहते थे बेटा राह चलते लोगों से बात मत करना, वो लोग अच्छे नहीं होते, बच्चों को किडनैप करके ले जाते है। माता पिता की इस बात को वो नकारती उससे पहले ही उसने टी०वी० में एक ख़बर देखी की कैसे कुछ दरिंदे छोटी बच्चियों का रेप कर देते है, इतना ही नही कुछ लोग तो जिस्मों का व्यापार भी करते हैं। तान्या ये सब ही देख सुनकर बड़ी हो रही थी, उसने दुनिया को, कुछ माता पिता की नज़रों से, कुछ किताबों से, लेकिन उससे भी ज्यादा टी०वी० देखकर जाना, क्योंकि अभी इतनी बड़ी नही हुई थी की लोगों के बीच में रहकर लोगों को जान सके। बचपन से स्कूल में अच्छे दोस्त मिले, अच्छे टीचर मिले शायद उसकी क़िस्मत अच्छी थी की जो वो देखती और सुनती आ रही थी अभी एक  वैसी किसी घटना से उसका सामना नहीं हुआ थ...

आख़िर कब तक

हम अगर चुप चाप सब सहन कर लेते है तो ये मत समझो हम बिल्कुल ही सहनशील है हम वक्त की नजाकत को समझते है शायद इसलिये ही हम तुम्हे माफ़ कर देते है...। आज नमिता ने कई साल बाद झल्लाते हुए निलेश से आखिर बोल ही दिया जो उसके जहन मे था...शादी के कुछ सालो बाद ही निलेश ने अपना ये रूप दिखा दिया था....निलेश को तो बस उसके जिस्म से प्यार था | ऑफिस से घर लौटते ही वो नमिता के साथ बत्तमीजी से बात करने लगता जब नमिता विरोध करती तो वो उससे कहता अपने मायेके चली जाओ चैन से रहोगी मैं भी अब तुम्हारा बोझ नही उठा प रहा हूँ... बस इस बात पर नमिता शांत हो जाती क्योकि घर वालो ने ही तो उसकी शादी जल्दी कर दी थी क्योकि उनके पास उसे आगे पढ़ाने के लिये पैसे नही थे पर शादी के लिये पूरा इंतजाम हो गया था...नमिता ने बहुत विनती भी की थी उनसे की वो कैसे भी पढ़ लेगी नौकरी करके और एक बार अपने पैरो पर खड़ी हो जाये फिर जहाँ चाहे उसकी शादी कर दे पर घर वाले उसकी एक न सुनने को तैयार थे..आज नमिता सोच रही थी की काश उसके घर वाले मान जाते तो इनकी बाते तो न सुननी पड़ती और मैं यहां से कही दूर जाके अपनी जिंदगी जी लेती..नमिता निलेश से बहुत...

'उड़ान ' एक नए आसमान की ओर...

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                       'उड़ान ' एक नए आसमान आज जब अनीश को सम्मानित किया जा रहा था तो कहीं भीड़ में बैठी अलीशा की आँखे छलक आयीं वो चाह कर भी उन आँसुओ को रुक न पायी,अनीश ने अलीशा से कहा था देखना एक दिन ये सब जो मुझसे मुँह फेरे खड़े हैं एक दिन मेरी सफलता पर खड़े होकर तालियां बाजयेंगे और देखो आज अनीश की अलीशा से कही बात सच हो गयी वैसे अनीश और अलीशा साथ तो नही है पर फिर भी जब अलीशा को ये पता चला कि आज अनीश को जिले के नेता जी अपने आलीशान आवास के पास बने हाल में सम्मनित करेंगे और हाल के अंदर जाने का कोई भी प्रवेश शुल्क नही है तो वो खुद को रुक नही पायी बस अनीश को खुश देखकर उसकी आँखों से अनीश के हिस्से के आँसू बहे तो फिर तब तक न रुके जब तक अनीश ने अलीशा के पास आकर उसके आँसुओ को अपने आँसू से रुक न दिया। 10 वर्ष पूर्व अनीश ने कंप्यूटर से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया फिर न जाने उसको कहाँ से फिल्मे बनाने की धुन सवार हो गयी उसने तये कर लिया अब वह फिल्मे बनाना सीखेगा बहुत खोज के बाद उसने कुछ पांच मास्टर लेवल की यूनिवर्सिटी ढूंढ निक...