संदेश

"अधूरा मगर पूरा इश्क़ "

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  कहीं किसी रोज़ ये सूरज भी ढल जायेगा, और एक दिन फिर तुझे मेरी याद आयेगी कभी मैं आई थी तेरे पास कभी तू चले आना मेरा प्यार अधूरा होके भी पूरा हो जायेगा।।                                                                  – तुम्हारी बबिता कुछ चंद लाइनें बबिता ने अपनी शादी के वक्त उस डायरी में लिख दी थी इस उम्मीद में के कभी राजन इसे पढ़ेगा ज़रूर... और फिर अगले दिन अपने एक अंजान व्यक्ति के साथ उसका विवाह सारे रीतिरिवाज़ के साथ कर दिया गया। बबीता और राजन एक दूसरे से बेहद प्रेम करते थे...लेकिन राजन एक बहुत ही गरीब घर से था अतः वो बबीता को सपने तो दिखा सकता है लेकिन उन्हें पूरा नहीं कर सकता.... दोनों के बीच जो अंडरस्टैंडिंग थी, वो देखते ही बनती थी और तालमेल इतना अच्छा होता भी ...

"हैवान"

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सूरज हर रोज निकलता है, दिन हर रोज़ बदलते है, फूल फिर खिलते हैं और छोटी छोटी कालिया पत्तो को ओट से दुनिया देखने को बेताब सी झांका करती है... लेकीन उस आदमी का क्या जो वक्त की एक चुटकी मात्र से आपनी हैवानियत पर उतर आता है? होश में होकर भी बेहोश रहता है? और उन महिलाओं का क्या जो आए दिन घरेलू हिंसा का शिकार होती है? जुलाई का महीना मानसून ने समय से कुछ पहले दस्तक दे दी हैं, कुछ हो न हो प्यार करने और प्यार जताने का असली मौसम तो यही होता है, जब सावन दस्तक देने को तैयार हरियाली को अपनी बाहों में समेटे हुए कुछ दूरी पर आस की नज़रों से खड़ा हमारे साथ साथ मानसून का आनन्द ले रहा होता है। नीमा दिनभर की थकान के बाद भी अचानक हुई झमाझम बारिश का  लुत्फ रमेश के साथ उठाने के लिए किचन में पकौड़ियां छान रहीं थी। रमेश कुछ दिनों से उदास चल रहा है, तभी नीमा ने सोचा देश में तो लॉकडाउन है ही चलो दिल के रिश्तों को ही सुधार लिया जाए जो जिंदगी की भागदौड़ में कहीं खो गए थे। रमेश शाम के समय बालकनी में रक्खे झूले पर बैठा, कुछ सोच रहा था, ये वहीं झूला था जो सबसे पहले इस घर में आया था, नीमा की सैलरी से और यहां दोनों ...

"अंदाज़ ऐ जिंदगी"

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  एक अंजान शहर और उस शहर के अंजान लोग, बहुत मुश्किल होता है एक अंजान शहर के लोगों में घुलना - मिलना और उनके कल्चरल के साथ साथ अपने कल्चरल और अपनी बंदिशों को ध्यान में रखना लेकीन सपनों को पूरा करने के लिए इंसान क्या कुछ नही करता.... ये कहानी है एक छोटे से गांव से अपने बड़े सपनों को हकीकत बनाने आई तान्या की ... माता पिता बचपन में कहते थे बेटा राह चलते लोगों से बात मत करना, वो लोग अच्छे नहीं होते, बच्चों को किडनैप करके ले जाते है। माता पिता की इस बात को वो नकारती उससे पहले ही उसने टी०वी० में एक ख़बर देखी की कैसे कुछ दरिंदे छोटी बच्चियों का रेप कर देते है, इतना ही नही कुछ लोग तो जिस्मों का व्यापार भी करते हैं। तान्या ये सब ही देख सुनकर बड़ी हो रही थी, उसने दुनिया को, कुछ माता पिता की नज़रों से, कुछ किताबों से, लेकिन उससे भी ज्यादा टी०वी० देखकर जाना, क्योंकि अभी इतनी बड़ी नही हुई थी की लोगों के बीच में रहकर लोगों को जान सके। बचपन से स्कूल में अच्छे दोस्त मिले, अच्छे टीचर मिले शायद उसकी क़िस्मत अच्छी थी की जो वो देखती और सुनती आ रही थी अभी एक  वैसी किसी घटना से उसका सामना नहीं हुआ थ...

" कैरियर और प्रेम" भाग -7

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                  "भाग-7 कैरियर और  प्रेम"    इस भाग को पढ़ने से पहले बाकी के छः भाग जरूर पढ़े यादि आप सीधे इस भाग को पढ़ेंगे तो उतना मजा नही आएगा मैंने कहानी की रचना इस तरह से की हैं की सातो भाग को मिलाकर पढ़ेंगे तो आपको पढ़ने में ज़्यादा आंनद आयेगा। एक तरफ दोनों का कैरियर था तो दूसरी तरफ उनका परवान चढ़ता हुआ प्यार, अरमान और रिद्धिमा मानो एक दूसरे के पूरक बन चुके हो... रिद्धिमा अरमान के बिन नही रहना चाहती तो, अरमान रिद्धिमा के बिन लेकिन दोनो साथ रह भी नही सकते थे जब तक दोनो अपना कैरियर न बना ले.... पहले कैरियर बनाने का मकसद सिर्फ ज्यादा से ज्यादा पैसे कमाना और खुद की हर उस कमी को पूरा करना था, जिसका अफ़सोस कही न कही रह गया है, लेकिन जब से अरमान रिद्धिमा की ज़िन्दगी में और रिद्धिमा अरमान की जिंदगी में आयी थी, उनका तो कैरियर बनाने का मकसद ही बदल गया था , वे दोनो बस अपनी एक छोटी सी दुनिया बनाना चाहते थे और उस दुनिया में संग मुस्कुराना चाहते थे। आज अरमान रिद्धिमा के साथ अपने रिलेशनशिप के पाँच साल सेलिब्रेट कर रहा है, एक फाइव स्टार होटल मे...

"एक बार फिर" भाग -6

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एक बार फिर      पहला प्यार पूरा हो या न हो लेकिन एक बार लौट के जरूर आता है।... एक साल गुज़र गये अरमान और रिद्धिमा को अलग हुए लेकिन न जाने क्यो रिद्धिमा को कभी कभी अचानक अफसोस होता था की उसे ऐसा नही करना चाहिये था, अरमान जैसा प्यार करने वाला लड़का कहाँ मिलेगा और ये सोचकर उसे रात रात भर नींद नही आती... दिल और दिमाग के खेल में उलझी रिद्धिमा बहुत परेशान हो गई थी... कभी वह खुद से कहती रिद्धिमा तेरे लिये तेरा कैरियर पहली चाहत है, एक बार तू कुछ बन गई फिर तो ये सब होता रहेगा और उसका दिल कहता स्वाति अब नही तो कब, रिद्धिमा दिल और दिमाग मे पहले ही फर्क करना नही जानती थी और अब वह दोनो के बीच में उलझ भी गई थी....कभी आईने मे खुद को देखती तो बस एक ही सवाल आता, क्या कोई इस चेहरे पर भी फिदा हो सकता है। उसे कभी ऊपर वाले से शिकायत तो नही की थी लेकिन अपने लिए कुछ सोचकर रखा था, एक बार जब वह कमाने लगेगी तो वो अपने दाँतो को ठीक करवा लेगी। आज तक लोग रिद्धिमा से काम के मतलब से ही बात करते थे कभी कोई दोस्त से ज़्यादा उसके बारे में नही सोचता और अति तो तब हो जाती जब उसके ही दोस्त उसे अनदेखा कर दिया करत...

"कैसे हुआ" भाग-5

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                                "कैसे हुआ" रिद्धिमा ने अर्पित से बात करना कम कर दिया था, कभी कभी अर्पित का मैसेज आता था सिर्फ हाल चाल पूछने के लिये क्योंकि इस वक़्त वह पढ़ाई में बहुत ही व्यस्त चल रहा था और इधर रिद्धिमा समझ गई थी किसी के पीछे भागने से क्या फ़ायदा क्यों न उधर ही जायें जो वाकई आपको प्यार करता है। कुछ दिन बाद जब अर्पित का मैसेज आया तो रिद्धिमा ने अरमान के बारे में सब बता दिया की कैसे अरमान ने उसे प्रपोज़ किया वह अर्पित से इस बारे मे पहले भी बात कर चुकी थी, इस बार अर्पित झुंझला कर बोला तुम मुझसे हमेशा अरमान की बात क्यो करती हो?  रिद्धिमा ने इस सवाल का जवाब देने में देर नही की और बोला क्योकि अरमान मुझे प्यार करता है और मैं जैसी भी हूँ उसे पसंद हूँ..... उसके बाद अर्पित का कोई रिप्लाई नही आया, वैसे अर्पित एक बहुत अच्छा दोस्त था, उसकी इंग्लिश में पकड़ बहुत अच्छी थी अतः उसने रिद्धिमा को भी सिखाने की पूरी कोशिश की और रिद्धिमा ने भी अर्पित का साथ दिया। छह महीने गुज़र गये रिद्धिमा और अरमान की दोस्ती धीरे ...

"अरमान और परिवार" भाग -4

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                      " अरमान और परिवार" फेसबुक में एक दिन अरमान का मैसेज आया, रिद्धिमा ने फॉर्मेलिटी पूरी करने के लिये रिप्लाई दे दिया....कुछ देर नॉर्मल हाय, हेलो हुआ और फिर रिद्धिमा अपने काम पर लग गई, उसे चैटिंग करना बिल्कुल नही पसंद था, वो भी ऐसे लोगो से जिन्हें वह पर्सनली न जानती हो...और दूसरी तरफ वो अर्पित से चैटिंग कर रही थी... अरमान ने भी किसी गलत इरादे से मैसेज नही किया था, वो तो बस एक दोस्त ढूढ़ रहा था, जिससे वो बात कर सके उस टाइम अरमान बहुत टूटा हुआ था, उसके घर में कुछ अविश्वनीय  घटित हो जाने के कारण। कभी कभी हम अपने बनाये उसूलो को भी भूल जाते है रिद्धिमा इस वक़्त यही कर रही थी एक तरफ उसे किसी अनजान से बात करना पसंद नही था दूसरी तरफ वो एक अनजान लड़के के साथ बाते करके सपनो की दुनिया में खो रही थी। अरमान के परिवार में पाँच लोग है, अरमान घर में सबसे छोटा और नटखट हुआ करता था लेकिन जैसे जैसे बड़ा हुआ जिम्मेदारियों ने उसे उम्र से भी ज्यादा बड़ा कर दिया। अरमान की माँ उसे बहुत प्यार करती थी और पापा तो बस पिटाई लगाया करते थे, एक बड़...