"कैसे हुआ" भाग-5
"कैसे हुआ"
रिद्धिमा ने अर्पित से बात करना कम कर दिया था, कभी कभी अर्पित का मैसेज आता था सिर्फ हाल चाल पूछने के लिये क्योंकि इस वक़्त वह पढ़ाई में बहुत ही व्यस्त चल रहा था और इधर रिद्धिमा समझ गई थी किसी के पीछे भागने से क्या फ़ायदा क्यों न उधर ही जायें जो वाकई आपको प्यार करता है।
कुछ दिन बाद जब अर्पित का मैसेज आया तो रिद्धिमा ने अरमान के बारे में सब बता दिया की कैसे अरमान ने उसे प्रपोज़ किया वह अर्पित से इस बारे मे पहले भी बात कर चुकी थी, इस बार अर्पित झुंझला कर बोला तुम मुझसे हमेशा अरमान की बात क्यो करती हो?
रिद्धिमा ने इस सवाल का जवाब देने में देर नही की और बोला क्योकि अरमान मुझे प्यार करता है और मैं जैसी भी हूँ उसे पसंद हूँ.....
उसके बाद अर्पित का कोई रिप्लाई नही आया, वैसे अर्पित एक बहुत अच्छा दोस्त था, उसकी इंग्लिश में पकड़ बहुत अच्छी थी अतः उसने रिद्धिमा को भी सिखाने की पूरी कोशिश की और रिद्धिमा ने भी अर्पित का साथ दिया।
छह महीने गुज़र गये रिद्धिमा और अरमान की दोस्ती धीरे धीरे प्यार में बदल ही रही थी की अचानक कुछ ऐसा हुआ जो दोनो ने कभी सोचा नही था।
अरमान ने इन छह महीनों में ,कभी भी अपनी बात से मुकरा नही और वो बस कहता रहा रिद्धिमा मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मुझे दोस्ती नही करनी तुमसे क्योकि उसका मानना था, जहाँ दोस्ती आती है वहाँ प्यार फ़ीका पड़ जाता है लेकिन जहाँ प्यार के बाद दोस्ती आती है वह ही असली दोस्ती और असली प्यार का रिश्ता होता है दूसरी तरफ़ रिद्धिमा की जिद थी पहले मेरे अच्छे दोस्त बनो मैं तुम्हे बिल्कुल अच्छे से जान लूँ फिर प्यार व्यार करूँगी।
अरमान कभी मुकरा नही और रिद्धिमा कभी हाँ तो कभी ना करती रही छह महीने इसी नोकझोंक में गुज़र गये आखिर अरमान थक गया।
रात के दो बज रहे है रिद्धिमा अपने लैपटॉप से फेसबुक पर ऑनलाइन हैं क्योकि उसका मोबाइल खराब हो गया है...
अरमान और रिद्धिमा की बहस जारी है, रिद्धिमा दिल की जगह दिमाग लगा रही है और दिमाग की जगह दिल, इसलिए वह साफ साफ तय नही कर पा रही आख़िर वो अरमान से चाहती क्या है।
अरमान हारकर बोला तुम पत्थर दिल हो तुम्हे इस बात से कभी कोई फ़र्क नही पड़ता की तुम्हारी बातो से सामने वाले पर क्या गुज़रती है...अचानक से आये इस तरह के मैसेज को रिद्धिमा सहन नही कर पाई और अरमान को ब्लॉक कर दिया।
लेकिन दूसरी सुबह उसे अजीब सी बेचैनी हुईं, उसने अरमान को पापा के मोबाइल से कॉल करके बोला आज मैं रिजल्ट के सिलसिले में कॉलेज जा रही हूँ और मेरा मोबाइल भी खराब हो गया है कॉलेज के पास में इसका सर्विस सेंटर है वहां इसे ठीक करवाने के लिये डालूँगी क्या वो साथ चलेगा.....
अरमान ने बोला मैं बिजी हूँ अगर टाइम हुआ तो आऊँगा....और फ़ोन कट कर दिया....
रिद्धिमा ने ऑफलाइन मैसेज करके बोला ये पापा का फोन है इसमे कॉल बैक मत करना मैं कॉलेज के गेट मे तुम्हारा इंतज़ार करूँगी....
रिद्धिमा कॉलेज पहुँची, और एक घंटे तक कॉलेज के गेट में अरमान का इंतज़ार किया लेकिन अरमान नही आया, रिद्धिमा इंतज़ार से हारकर कॉलेज के ऑफिस चली गई, वहां उसे कुछ फॉर्म फिल करने को दिया गया और दूसरे ऑफिस में जमा करने को बोला गया, रिद्धिमा ने जल्दी जल्दी फॉर्म फिल किया, दूसरे ऑफिस जाने से पहले वह कॉलेज के मेन गेट पर अरमान को देखने गई कही अरमान वेट तो नही कर रहा, लेकिन गेट पर कोई नही था, उसकी नज़र कॉलेज के जिस छोर तक गई उसने अपनी नज़र उतनी दूर तक दौड़ाई लेकिन अरमान कही भी नज़र नही आया....
ऐसा रिद्धिमा ने तीन चार बार किया ऑफिस से कॉलेज के मेन गेट की दूरी लगभग एक किलोमीटर तो होगी ही रिद्धिमा पागलो की तरह एक बार अंदर जाती तो एक बार बाहर....
सारा काम हो जाने के बाद भी, जुलाई की गर्मी में रिद्धिमा ने अरमान का आधे घंटे और इंतज़ार किया शायद अरमान आ जाये, जब इस बात का भरोसा हो गया अरमान नही आने वाला, वह खुद को बहुत कोसने लगी उसकी आँखों में आँसू आ गये...
(शायद अचानक से आँखों में आया ये पानी इस बात की गवाही दे रहा था की रिद्धिमा अरमान को बहुत चाहने लगी है...)
खुद से बात करते हुए वह सर्विस सेंटर की तरफ बढ़ने लगी और खुद से कहती जा रही थी, बोला था न ये प्यार व्यार कुछ नही होता मत पढ़ इस चक्कर में लेकिन तुझे तू सुनना ही नही था ये कोई और नही उसके दिल और दिमाग थे जो आपस में लड़ रहे थे जिनके झगड़े की आवाज़ रिद्धिमा के अल्फ़ाज़ों से बयां हो रही थी।
अभी ये लड़ाई खत्म नही हुई थी अभी तो जले में नमक डालना बाकी था जैसे ही रिद्धिमा सर्विस सेंटर पहुँची और अपना मोबाइल दिखाने गई तो रिसेप्शन में बैठी लड़कीं ने बोला की मैम अभी हमारा सर्विस बॉय दूसरे डिवाइस की सेटिंग में बिजी है आप वहाँ बैठ जाइए जब वो फ्री हो जाएँगे हम आपको बुला लेंगे.....
रिद्धिमा बैठ गई जाके पास में एक कपल बैठा था और वो लगातार एक दूसरे से बात करते जा रहे थे, वह लड़का कभी उसके कंधे में हाथ डालता, तो कभी उसके होठो को अपने हाथो से छूता, रिसेप्शन ने एक दो बार उन्हें मना भी किया, इस तरह की हरकते आप यहाँ नही कर सकते, प्लीज अगर आपको यही करना है तो बाहर चले जाइये...इसपर लड़कीं बोल पड़ी हम तो सिर्फ बात कर रहे है, आप हमारा मोबाइल देख लीजिये जल्दी, हम चले जाएँगे....रिद्धिमा को ये सब देखकर और भी गुस्सा आ रहा था....दिमाग बोला, "देख यही होता है प्यार जो चार लोगो में आपको बदनाम करता है", तभी दिल से आवाज़ आयी कितने अच्छे लग रहे है दोनो साथ में काश अरमान भी यहाँ होता.....तीन घंटे बीत गये रिद्धिमा को यहाँ बैठे बैठे उसने रिसेप्शन को देखा तो उन्होंने इशारे से बोला , " बस थोड़ी देर और", रिद्धिमा ने अपने आगे वाले लड़के से मोबाइल मांगा और घर में कॉल किया बोली," पापा अभी मुझे आने में थोड़ी और देर लग जायेगी"....ये किसी और से फोन मांगकर कर रही हूँ।
एकबार रिद्धिमान का मन हुआ की अरमान को भी फोन करूँ लेकिन रिद्धिमा को अरमान का नंबर याद नही था....वह मायूस होकर बैठ गई और अपनी बारी का इन्तज़ार करने लगी....
आखिर में उसकी बारी आ गई वहां भी एक फॉर्म फिल किया और मोबाइल जमा कर दिया उन्होंने बोला आप तीन दिन बाद अपना मोबाइल ले जाइयेगा।
घर आके रिद्धिमा ने खाना खाया सारे काम करते करते रात के नौ बज गये, लैपटॉप उठाया फेसबुक पर गई और अरमान को अनब्लॉक किया.....
फिर शुरू हुआ झगड़ा उसने दिन भर की बाते बतायी अरमान को....अरमान बोला बुआ घर आई थी उन्हें स्टेशन छोड़ने जाना था इसलिये नही आ पाया....बहुत कहा सुनी हुई दोनो के बीच और अंत में ये निष्कर्ष निकला की रिद्धिमा अरमान के साथ नही रहना चाहती।
उधर अरमान रो रहा था तो इधर रिद्धिमा, लेकिन रिद्धिमा ने सोच लिया था अगर किसी के साथ भी प्यार में रही उसका ऐसे ही मजाक बनेगा वो कौन सा बहुत खूबसूरत है जो उसके कहने पर कोई अपने सारे काम छोड़कर उससे मिलने चला आयेगा....अरमान को एक बार और उसने हर जगह से ब्लॉक कर दिया....
अरमान और रिद्धिमा अलग हो गये.....
************स्वाति की कलम से- "कैसे हुआ??"*************
"पहली मुलाकात का भाग-5"
रिद्धिमा ने अर्पित से बात करना कम कर दिया था, कभी कभी अर्पित का मैसेज आता था सिर्फ हाल चाल पूछने के लिये क्योंकि इस वक़्त वह पढ़ाई में बहुत ही व्यस्त चल रहा था और इधर रिद्धिमा समझ गई थी किसी के पीछे भागने से क्या फ़ायदा क्यों न उधर ही जायें जो वाकई आपको प्यार करता है।
कुछ दिन बाद जब अर्पित का मैसेज आया तो रिद्धिमा ने अरमान के बारे में सब बता दिया की कैसे अरमान ने उसे प्रपोज़ किया वह अर्पित से इस बारे मे पहले भी बात कर चुकी थी, इस बार अर्पित झुंझला कर बोला तुम मुझसे हमेशा अरमान की बात क्यो करती हो?
रिद्धिमा ने इस सवाल का जवाब देने में देर नही की और बोला क्योकि अरमान मुझे प्यार करता है और मैं जैसी भी हूँ उसे पसंद हूँ.....
उसके बाद अर्पित का कोई रिप्लाई नही आया, वैसे अर्पित एक बहुत अच्छा दोस्त था, उसकी इंग्लिश में पकड़ बहुत अच्छी थी अतः उसने रिद्धिमा को भी सिखाने की पूरी कोशिश की और रिद्धिमा ने भी अर्पित का साथ दिया।
छह महीने गुज़र गये रिद्धिमा और अरमान की दोस्ती धीरे धीरे प्यार में बदल ही रही थी की अचानक कुछ ऐसा हुआ जो दोनो ने कभी सोचा नही था।
अरमान ने इन छह महीनों में ,कभी भी अपनी बात से मुकरा नही और वो बस कहता रहा रिद्धिमा मैं तुमसे प्यार करता हूँ, मुझे दोस्ती नही करनी तुमसे क्योकि उसका मानना था, जहाँ दोस्ती आती है वहाँ प्यार फ़ीका पड़ जाता है लेकिन जहाँ प्यार के बाद दोस्ती आती है वह ही असली दोस्ती और असली प्यार का रिश्ता होता है दूसरी तरफ़ रिद्धिमा की जिद थी पहले मेरे अच्छे दोस्त बनो मैं तुम्हे बिल्कुल अच्छे से जान लूँ फिर प्यार व्यार करूँगी।
अरमान कभी मुकरा नही और रिद्धिमा कभी हाँ तो कभी ना करती रही छह महीने इसी नोकझोंक में गुज़र गये आखिर अरमान थक गया।
रात के दो बज रहे है रिद्धिमा अपने लैपटॉप से फेसबुक पर ऑनलाइन हैं क्योकि उसका मोबाइल खराब हो गया है...
अरमान और रिद्धिमा की बहस जारी है, रिद्धिमा दिल की जगह दिमाग लगा रही है और दिमाग की जगह दिल, इसलिए वह साफ साफ तय नही कर पा रही आख़िर वो अरमान से चाहती क्या है।
अरमान हारकर बोला तुम पत्थर दिल हो तुम्हे इस बात से कभी कोई फ़र्क नही पड़ता की तुम्हारी बातो से सामने वाले पर क्या गुज़रती है...अचानक से आये इस तरह के मैसेज को रिद्धिमा सहन नही कर पाई और अरमान को ब्लॉक कर दिया।
लेकिन दूसरी सुबह उसे अजीब सी बेचैनी हुईं, उसने अरमान को पापा के मोबाइल से कॉल करके बोला आज मैं रिजल्ट के सिलसिले में कॉलेज जा रही हूँ और मेरा मोबाइल भी खराब हो गया है कॉलेज के पास में इसका सर्विस सेंटर है वहां इसे ठीक करवाने के लिये डालूँगी क्या वो साथ चलेगा.....
अरमान ने बोला मैं बिजी हूँ अगर टाइम हुआ तो आऊँगा....और फ़ोन कट कर दिया....
रिद्धिमा ने ऑफलाइन मैसेज करके बोला ये पापा का फोन है इसमे कॉल बैक मत करना मैं कॉलेज के गेट मे तुम्हारा इंतज़ार करूँगी....
रिद्धिमा कॉलेज पहुँची, और एक घंटे तक कॉलेज के गेट में अरमान का इंतज़ार किया लेकिन अरमान नही आया, रिद्धिमा इंतज़ार से हारकर कॉलेज के ऑफिस चली गई, वहां उसे कुछ फॉर्म फिल करने को दिया गया और दूसरे ऑफिस में जमा करने को बोला गया, रिद्धिमा ने जल्दी जल्दी फॉर्म फिल किया, दूसरे ऑफिस जाने से पहले वह कॉलेज के मेन गेट पर अरमान को देखने गई कही अरमान वेट तो नही कर रहा, लेकिन गेट पर कोई नही था, उसकी नज़र कॉलेज के जिस छोर तक गई उसने अपनी नज़र उतनी दूर तक दौड़ाई लेकिन अरमान कही भी नज़र नही आया....
ऐसा रिद्धिमा ने तीन चार बार किया ऑफिस से कॉलेज के मेन गेट की दूरी लगभग एक किलोमीटर तो होगी ही रिद्धिमा पागलो की तरह एक बार अंदर जाती तो एक बार बाहर....
सारा काम हो जाने के बाद भी, जुलाई की गर्मी में रिद्धिमा ने अरमान का आधे घंटे और इंतज़ार किया शायद अरमान आ जाये, जब इस बात का भरोसा हो गया अरमान नही आने वाला, वह खुद को बहुत कोसने लगी उसकी आँखों में आँसू आ गये...
(शायद अचानक से आँखों में आया ये पानी इस बात की गवाही दे रहा था की रिद्धिमा अरमान को बहुत चाहने लगी है...)
खुद से बात करते हुए वह सर्विस सेंटर की तरफ बढ़ने लगी और खुद से कहती जा रही थी, बोला था न ये प्यार व्यार कुछ नही होता मत पढ़ इस चक्कर में लेकिन तुझे तू सुनना ही नही था ये कोई और नही उसके दिल और दिमाग थे जो आपस में लड़ रहे थे जिनके झगड़े की आवाज़ रिद्धिमा के अल्फ़ाज़ों से बयां हो रही थी।
अभी ये लड़ाई खत्म नही हुई थी अभी तो जले में नमक डालना बाकी था जैसे ही रिद्धिमा सर्विस सेंटर पहुँची और अपना मोबाइल दिखाने गई तो रिसेप्शन में बैठी लड़कीं ने बोला की मैम अभी हमारा सर्विस बॉय दूसरे डिवाइस की सेटिंग में बिजी है आप वहाँ बैठ जाइए जब वो फ्री हो जाएँगे हम आपको बुला लेंगे.....
रिद्धिमा बैठ गई जाके पास में एक कपल बैठा था और वो लगातार एक दूसरे से बात करते जा रहे थे, वह लड़का कभी उसके कंधे में हाथ डालता, तो कभी उसके होठो को अपने हाथो से छूता, रिसेप्शन ने एक दो बार उन्हें मना भी किया, इस तरह की हरकते आप यहाँ नही कर सकते, प्लीज अगर आपको यही करना है तो बाहर चले जाइये...इसपर लड़कीं बोल पड़ी हम तो सिर्फ बात कर रहे है, आप हमारा मोबाइल देख लीजिये जल्दी, हम चले जाएँगे....रिद्धिमा को ये सब देखकर और भी गुस्सा आ रहा था....दिमाग बोला, "देख यही होता है प्यार जो चार लोगो में आपको बदनाम करता है", तभी दिल से आवाज़ आयी कितने अच्छे लग रहे है दोनो साथ में काश अरमान भी यहाँ होता.....तीन घंटे बीत गये रिद्धिमा को यहाँ बैठे बैठे उसने रिसेप्शन को देखा तो उन्होंने इशारे से बोला , " बस थोड़ी देर और", रिद्धिमा ने अपने आगे वाले लड़के से मोबाइल मांगा और घर में कॉल किया बोली," पापा अभी मुझे आने में थोड़ी और देर लग जायेगी"....ये किसी और से फोन मांगकर कर रही हूँ।
एकबार रिद्धिमान का मन हुआ की अरमान को भी फोन करूँ लेकिन रिद्धिमा को अरमान का नंबर याद नही था....वह मायूस होकर बैठ गई और अपनी बारी का इन्तज़ार करने लगी....
आखिर में उसकी बारी आ गई वहां भी एक फॉर्म फिल किया और मोबाइल जमा कर दिया उन्होंने बोला आप तीन दिन बाद अपना मोबाइल ले जाइयेगा।
घर आके रिद्धिमा ने खाना खाया सारे काम करते करते रात के नौ बज गये, लैपटॉप उठाया फेसबुक पर गई और अरमान को अनब्लॉक किया.....
फिर शुरू हुआ झगड़ा उसने दिन भर की बाते बतायी अरमान को....अरमान बोला बुआ घर आई थी उन्हें स्टेशन छोड़ने जाना था इसलिये नही आ पाया....बहुत कहा सुनी हुई दोनो के बीच और अंत में ये निष्कर्ष निकला की रिद्धिमा अरमान के साथ नही रहना चाहती।
उधर अरमान रो रहा था तो इधर रिद्धिमा, लेकिन रिद्धिमा ने सोच लिया था अगर किसी के साथ भी प्यार में रही उसका ऐसे ही मजाक बनेगा वो कौन सा बहुत खूबसूरत है जो उसके कहने पर कोई अपने सारे काम छोड़कर उससे मिलने चला आयेगा....अरमान को एक बार और उसने हर जगह से ब्लॉक कर दिया....
अरमान और रिद्धिमा अलग हो गये.....
************स्वाति की कलम से- "कैसे हुआ??"*************
"पहली मुलाकात का भाग-5"

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