"रिद्धिमा और परिवार" भाग-3
"रिद्धिमा और परिवार"
रिद्धिमा घर आ गई, वो बहुत खुश रहने लगी थी, अपना ख्याल पहले से ज्यादा रखने लगी थी, ये वही रिद्धिमा थी जिसका लोग अक्सर अनजाने में ही मजाक उड़ा दिया करते थे, उसके दाँत थोड़े से बड़े थे और बाहर भी निकले हुए थे, लेकिन रिद्धिमा को खुद से कोई शिकायत नही थी, वह खुद को प्यार तो करती थी और उसके पास जो भी है अक्सर ऊपर वाले को उसके लिए धन्यवाद भी किया करती थी,लिखने की शौकीन रिद्धिमा बिना प्यार का अहसास किये ही प्यार को खूबसूरत लिखती थी।
रिद्धिमा घर की बड़ी बेटी है, और सारे भाई बहनों में दूसरे नंबर पर आती है, एक बड़े भईया जो सॉफ्टवेयर इंजिनियर है, पापा की तबियत ख़राब होने के बाद से घर की सारी जिम्मेदारी बड़े भईया ने ले ली, और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे है।
रिद्धिमा के ख़्वाब थोड़े ज्यादा बड़े है, क्योंकि वह लिखती अच्छा अतः वह बॉलीवुड इंडस्ट्री के प्रत्येक क्षेत्र में खुद को आजमाना चाहती है, फिलहाल घर वालो की खुशी के लिए बी० एस० सी० फाइनल ईयर का एग्जाम दिया है और आगे के लिए ठान लिया है कि अब वहीं करेगी जो उसे खुशी दे, जिसके लिए वो इस दुनिया में अाई है, उसका मानना है धीरे धीरे ही सही सब को वो सबकुछ मिल ही जाता है जिसकी वो कामना सच्चे दिल से करते है...
ओम शांति ओम का वो डायलॉग तो सुना ही होगा....
इतनी सिद्दत से मैन तुम्हे पाने की कोशिश की है की हर जर्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साज़िश की है....
कहते है न जब तुम किसी चीज़ को दिल से चाहते हो तो हर क़ायनात तुम्हे उससे मिलाने में लग जाती हैं....
लेकिन शायद प्यार के मामले में थोड़ी कच्ची थी रिद्धिमा उसका भी सभी लड़कियों की तरह मानना था की उसका बॉयफ्रेंड सबसे स्मार्ट होना चाहिए, डोले-शोले वाला, वो अभी प्यार का मतलब सिर्फ बाहरी सुंदरता को ही मानती थी।
भीतरी उसको चाहिए था गाने में उसके पापा की तरह और नेचर में भाई की तरह जिन्होंने आज तक खाने में नमक कम होने तक की शिकायत भी नही की थी।
रिद्धिमा भईया के इस नेचर से थोड़ा नही बहुत ही हैरान रहा करती थी, आखिर कोई इतना शांत कैसे हो सकता है क्योकि वह खुद अपने भाई के बिल्कुल विपरीत थी।
इसलिए दोनों की बनती भी नही थी आये दिन किसी न किसी बात पर झगड़ा हो ही जाता था, गौर करने वाली बात तो ये थी की जो भाई कभी किसी से कुछ नही बोलता था वो रिद्धिमा से झगड़ा किया करता था और दोनो को ही नही इस बात का पता नही चला की इस झगड़े की वजह से वो दोनो कितने दूर हो गये थे।
बचपन में छोटी मोटी बात पर जब भी झगड़ा होता तो भईया अक्सर रिद्धिमा से बोलता की तुम मुझसे दो हाथ के दूरी में बैठोगी....और ऐसे झगड़े रोज होने की वजह से रिद्धिमा अपने भाई को सिर्फ रक्षाबंधन के दिन ही हाथ लगाती थी और पूरा साल ऐसे ही गुज़र जाता था।
रिद्धिमा के पापा उसे बचपन में तो बहुत प्यार करते थे, लेकिन रिद्धिमा जैसे जैसे बड़ी हो रही थी, वैसे वैसे उसकी गलतियां बढ़ने लगी अब पापा बात बात पर उसे डांटा करते थे।
और ये जो भी उसके साथ हो रहा था, उसे अब लगने लगा था उसे कोई भी प्यार नही करता, शायद इन सब बातो के चलते ही उसने बहुत ही छोटी उम्र में कलम का सहारा ले लिया था, कहते है जो चीज़ इंसान को नही मिलती उसकी व्याख्या वह बहुत अच्छे से करता है,यह भी एक कारण की वो प्यार को बहुत खूबसूरत लिखा करती थी।
रिद्धिमा की जिंदगी में आने वाला पहला एक तरफ़ा प्यार था शरद जो बाहर से बहुत खूबसूरत दिखता था नेचर का पता नही था लेकिन गाता बहुत अच्छा था, उसपर कॉलेज की सभी लड़कियाँ जान छिड़कती थी, रिद्धिमा ने दो साल बाद हिम्मत करके शरद को मैसेज किया था, शरद, "यू आर माई फर्स्ट क्रश"....उधर से रिप्लाई आया....ये क्रश क्या होता हैं??...रिद्धिमा ने भी बात को घुमाते हुए बोला उसे भी नही पता , एल० ओ० एल०....बस इतना था शरद और रिद्धिमा का प्यार....
एक साल फेल होने की वजह से बहुत अकेली हो गई थी, रिद्धिमा किसी को ढूंढ़ रही थी, जो उसे सुन सके जब वह ब०एस०सी० थर्ड ईयर में पहुँची ही थी, उसे फब पर एक फैमिली रिलेटिव मिला.... 'अर्पित' जिसके बारे में बड़ी दी ने बहुत तारीफ़ की थी, की वह बहुत अच्छा लड़का है, और न जाने क्या क्या, थोड़े ही समय में रिद्धिमा और अर्पित की बहुत बनने लगी थी, अर्पित दिल्ली में रहकर आई० ए० एस० की तैयारी कर रहा था,जब भी फ़्री होता रिद्धिमा से बात करता, अच्छे दोस्त की तरह उसकी कविताएं सुनता कुछ अपनी सुनाता करीबन 6-7 महीने बहुत अच्छा चला दोनो के बीच रात रात भर बाते करते थे दोनो, फिर एक दिन रिद्धिमा ने अर्पित को बोला की क्या वह रिद्धिमा कविताओं का राजदार बनेगा??
उस वक़्त अर्पित थोड़ा व्यस्त चल रहा था, इस वजह से दो दिन तक मैसेज नही देखा और जब देखा तो बोला रिद्धिमा मैं पसंद तो करता हूँ तुम्हे, लेकिन शादी घर वालो की मर्ज़ी से करूँगा.....
इस पर रिद्धिमा ने भी बोला ठीक है, लेकिन हम तब तक तो साथ रह सकते है, रिद्धिमा को लगा था की वह अर्पित का दिल जीत लेगी, अब बात पहले जैसी नही रह गई थी, दोस्ती के बीच प्यार ने दस्तक जो दे दी थी, अब रात में दोस्ती की नही प्यार की बाते हुआ करती थी, ताज्जुब वाली बात तो ये थी, की दोनो ने मोबाइल में ही एक दूसरे को देखा था हकीकत में नही....
और इसी बीच अरमान भी आ चुका था, रिद्धिमा की जिंदगी में दोस्त बनकर, रिद्धिमा की एक आदत थी वह जल्दी किसी भी लड़के से बात नही किया करती थी, उस वक़्त रिद्धिमा का अरमान के साथ ऐसा ही व्यवहार हुआ करता था वो अरमान को इग्नोर करने की पूरी कोशिश करती थी....
स्वाति की कलम से- "रिद्धिमा और परिवार"
***************पहली मुलाकात का भाग-3**************
रिद्धिमा घर आ गई, वो बहुत खुश रहने लगी थी, अपना ख्याल पहले से ज्यादा रखने लगी थी, ये वही रिद्धिमा थी जिसका लोग अक्सर अनजाने में ही मजाक उड़ा दिया करते थे, उसके दाँत थोड़े से बड़े थे और बाहर भी निकले हुए थे, लेकिन रिद्धिमा को खुद से कोई शिकायत नही थी, वह खुद को प्यार तो करती थी और उसके पास जो भी है अक्सर ऊपर वाले को उसके लिए धन्यवाद भी किया करती थी,लिखने की शौकीन रिद्धिमा बिना प्यार का अहसास किये ही प्यार को खूबसूरत लिखती थी।
रिद्धिमा घर की बड़ी बेटी है, और सारे भाई बहनों में दूसरे नंबर पर आती है, एक बड़े भईया जो सॉफ्टवेयर इंजिनियर है, पापा की तबियत ख़राब होने के बाद से घर की सारी जिम्मेदारी बड़े भईया ने ले ली, और अपनी जिम्मेदारी को बखूबी निभा रहे है।
रिद्धिमा के ख़्वाब थोड़े ज्यादा बड़े है, क्योंकि वह लिखती अच्छा अतः वह बॉलीवुड इंडस्ट्री के प्रत्येक क्षेत्र में खुद को आजमाना चाहती है, फिलहाल घर वालो की खुशी के लिए बी० एस० सी० फाइनल ईयर का एग्जाम दिया है और आगे के लिए ठान लिया है कि अब वहीं करेगी जो उसे खुशी दे, जिसके लिए वो इस दुनिया में अाई है, उसका मानना है धीरे धीरे ही सही सब को वो सबकुछ मिल ही जाता है जिसकी वो कामना सच्चे दिल से करते है...
ओम शांति ओम का वो डायलॉग तो सुना ही होगा....
इतनी सिद्दत से मैन तुम्हे पाने की कोशिश की है की हर जर्रे ने मुझे तुमसे मिलाने की साज़िश की है....
कहते है न जब तुम किसी चीज़ को दिल से चाहते हो तो हर क़ायनात तुम्हे उससे मिलाने में लग जाती हैं....
लेकिन शायद प्यार के मामले में थोड़ी कच्ची थी रिद्धिमा उसका भी सभी लड़कियों की तरह मानना था की उसका बॉयफ्रेंड सबसे स्मार्ट होना चाहिए, डोले-शोले वाला, वो अभी प्यार का मतलब सिर्फ बाहरी सुंदरता को ही मानती थी।
भीतरी उसको चाहिए था गाने में उसके पापा की तरह और नेचर में भाई की तरह जिन्होंने आज तक खाने में नमक कम होने तक की शिकायत भी नही की थी।
रिद्धिमा भईया के इस नेचर से थोड़ा नही बहुत ही हैरान रहा करती थी, आखिर कोई इतना शांत कैसे हो सकता है क्योकि वह खुद अपने भाई के बिल्कुल विपरीत थी।
इसलिए दोनों की बनती भी नही थी आये दिन किसी न किसी बात पर झगड़ा हो ही जाता था, गौर करने वाली बात तो ये थी की जो भाई कभी किसी से कुछ नही बोलता था वो रिद्धिमा से झगड़ा किया करता था और दोनो को ही नही इस बात का पता नही चला की इस झगड़े की वजह से वो दोनो कितने दूर हो गये थे।
बचपन में छोटी मोटी बात पर जब भी झगड़ा होता तो भईया अक्सर रिद्धिमा से बोलता की तुम मुझसे दो हाथ के दूरी में बैठोगी....और ऐसे झगड़े रोज होने की वजह से रिद्धिमा अपने भाई को सिर्फ रक्षाबंधन के दिन ही हाथ लगाती थी और पूरा साल ऐसे ही गुज़र जाता था।
रिद्धिमा के पापा उसे बचपन में तो बहुत प्यार करते थे, लेकिन रिद्धिमा जैसे जैसे बड़ी हो रही थी, वैसे वैसे उसकी गलतियां बढ़ने लगी अब पापा बात बात पर उसे डांटा करते थे।
और ये जो भी उसके साथ हो रहा था, उसे अब लगने लगा था उसे कोई भी प्यार नही करता, शायद इन सब बातो के चलते ही उसने बहुत ही छोटी उम्र में कलम का सहारा ले लिया था, कहते है जो चीज़ इंसान को नही मिलती उसकी व्याख्या वह बहुत अच्छे से करता है,यह भी एक कारण की वो प्यार को बहुत खूबसूरत लिखा करती थी।
रिद्धिमा की जिंदगी में आने वाला पहला एक तरफ़ा प्यार था शरद जो बाहर से बहुत खूबसूरत दिखता था नेचर का पता नही था लेकिन गाता बहुत अच्छा था, उसपर कॉलेज की सभी लड़कियाँ जान छिड़कती थी, रिद्धिमा ने दो साल बाद हिम्मत करके शरद को मैसेज किया था, शरद, "यू आर माई फर्स्ट क्रश"....उधर से रिप्लाई आया....ये क्रश क्या होता हैं??...रिद्धिमा ने भी बात को घुमाते हुए बोला उसे भी नही पता , एल० ओ० एल०....बस इतना था शरद और रिद्धिमा का प्यार....
एक साल फेल होने की वजह से बहुत अकेली हो गई थी, रिद्धिमा किसी को ढूंढ़ रही थी, जो उसे सुन सके जब वह ब०एस०सी० थर्ड ईयर में पहुँची ही थी, उसे फब पर एक फैमिली रिलेटिव मिला.... 'अर्पित' जिसके बारे में बड़ी दी ने बहुत तारीफ़ की थी, की वह बहुत अच्छा लड़का है, और न जाने क्या क्या, थोड़े ही समय में रिद्धिमा और अर्पित की बहुत बनने लगी थी, अर्पित दिल्ली में रहकर आई० ए० एस० की तैयारी कर रहा था,जब भी फ़्री होता रिद्धिमा से बात करता, अच्छे दोस्त की तरह उसकी कविताएं सुनता कुछ अपनी सुनाता करीबन 6-7 महीने बहुत अच्छा चला दोनो के बीच रात रात भर बाते करते थे दोनो, फिर एक दिन रिद्धिमा ने अर्पित को बोला की क्या वह रिद्धिमा कविताओं का राजदार बनेगा??
उस वक़्त अर्पित थोड़ा व्यस्त चल रहा था, इस वजह से दो दिन तक मैसेज नही देखा और जब देखा तो बोला रिद्धिमा मैं पसंद तो करता हूँ तुम्हे, लेकिन शादी घर वालो की मर्ज़ी से करूँगा.....
इस पर रिद्धिमा ने भी बोला ठीक है, लेकिन हम तब तक तो साथ रह सकते है, रिद्धिमा को लगा था की वह अर्पित का दिल जीत लेगी, अब बात पहले जैसी नही रह गई थी, दोस्ती के बीच प्यार ने दस्तक जो दे दी थी, अब रात में दोस्ती की नही प्यार की बाते हुआ करती थी, ताज्जुब वाली बात तो ये थी, की दोनो ने मोबाइल में ही एक दूसरे को देखा था हकीकत में नही....
और इसी बीच अरमान भी आ चुका था, रिद्धिमा की जिंदगी में दोस्त बनकर, रिद्धिमा की एक आदत थी वह जल्दी किसी भी लड़के से बात नही किया करती थी, उस वक़्त रिद्धिमा का अरमान के साथ ऐसा ही व्यवहार हुआ करता था वो अरमान को इग्नोर करने की पूरी कोशिश करती थी....
स्वाति की कलम से- "रिद्धिमा और परिवार"
***************पहली मुलाकात का भाग-3**************

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें