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आख़िर कब तक

हम अगर चुप चाप सब सहन कर लेते है तो ये मत समझो हम बिल्कुल ही सहनशील है हम वक्त की नजाकत को समझते है शायद इसलिये ही हम तुम्हे माफ़ कर देते है...। आज नमिता ने कई साल बाद झल्लाते हुए निलेश से आखिर बोल ही दिया जो उसके जहन मे था...शादी के कुछ सालो बाद ही निलेश ने अपना ये रूप दिखा दिया था....निलेश को तो बस उसके जिस्म से प्यार था | ऑफिस से घर लौटते ही वो नमिता के साथ बत्तमीजी से बात करने लगता जब नमिता विरोध करती तो वो उससे कहता अपने मायेके चली जाओ चैन से रहोगी मैं भी अब तुम्हारा बोझ नही उठा प रहा हूँ... बस इस बात पर नमिता शांत हो जाती क्योकि घर वालो ने ही तो उसकी शादी जल्दी कर दी थी क्योकि उनके पास उसे आगे पढ़ाने के लिये पैसे नही थे पर शादी के लिये पूरा इंतजाम हो गया था...नमिता ने बहुत विनती भी की थी उनसे की वो कैसे भी पढ़ लेगी नौकरी करके और एक बार अपने पैरो पर खड़ी हो जाये फिर जहाँ चाहे उसकी शादी कर दे पर घर वाले उसकी एक न सुनने को तैयार थे..आज नमिता सोच रही थी की काश उसके घर वाले मान जाते तो इनकी बाते तो न सुननी पड़ती और मैं यहां से कही दूर जाके अपनी जिंदगी जी लेती..नमिता निलेश से बहुत...

लव@ट्रेन

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आज गरिमा पापा के साथ इलाहबाद ज रही थी... उसने सोचा भी नही था उसे उसका पहला प्यार ट्रेन मे मिलेगा। सुबह 6 बजे की ट्रेन थी। पापा ने रास्ते से कुछ फल लिये और गरिमा ने एक न्यूज़ पपेर.....ट्रेन की बोगी मे चार लोगों वाली सीट मे गरिमा बैठी और खिड़की वाली सीट मे उसके पापा बैठ गये। ट्रेन अपने गन्तव्य के लिये रवाना हो गयी..... उस बोगी मे तीन चार खिड़की वाली सीट छोड़कर कुछ लड़के बैठे थे,जो कानपुर मे रह रहे थे और त्योहार मनाने अपने घर इलाहबाद ज रहे थे। गरिमा की नज़र एक लड़के पर पड़ी जो मोटा तो था और बिल्कुल भी आकर्षक नही था...अतः गरिमा की नज़र जिस तरह घूमते हुए उस लड़के तक गयी थी वैसे ही घूमते हुए वापस अ गयी। सफ़र शुरू हुए एक घंटे गुज़र चुके थे..कुछ देर बाद गरिमा की नज़र फिर उस तरफ गयी इसबार एक खूबसूरत स लड़का उस सीट पर बैठा था...जो खुद भी गरिमा की तरफ ही देख रहा था...अब गरिमा की आँखे परेशा न हो गयी...पहले तो वो समझ न पायी इस क्रिया की क्या प्रतिक्रिया दे। फिर कुछ देर बाद गरिमा भी उसकी ओर देखने लगी....और देखते ही देखते न जाने कब आँखे चार हो गयी प्रिया का खुद पर कंट्रोल न रहा था...वो चाह रही थी ये...

'कॉन्वेंट स्कूल'

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                               'कॉन्वेंट स्कूल मेघा की एंट्री..मेघा ग्रेजुएट हो चुकी थी ।आगे की पढ़ाई के लिये उसको पैसो की जरूरत थी।उसने सोचा क्यो न किसी स्कूल मे पढ़ा कर कुछ पैसे कमा ले फिर मास्टर्स मे दाखिला ले लेगी,इसी के चलते उसने दो तीन स्कूलों मे आर्जी लगा दी..और कुछ मे इंटरव्यू भी पास कर लिया...भले ही उसने यूपी बोर्ड से पढ़ाई की थी पर बैचलर डिग्री लेने के बाद अंग्रेज़ी मे भी उसकी पकड़ अच्छी हो गयी थी, अतः उसने शहर के कॉन्वेन्ट स्कूलों मे भी अर्जी लगायी....उनमे से एक स्कूल मे आर्जी लगते ही  इंटरव्यू कॉल भी अ गया। मेघा कॉन्फिडेंस से भारी हुई थी...वो तो उस बड़े स्कूल में पढ़ाने के सपने भी देखने लगी थी...पर जब वो अंदर जाकर बाहर निकली तो उसने अपना मूड़ बदल लिया था...उसने सीधे और साफ लफ़्ज़ों मे कहा मुझे इस स्कूल मे नही पढ़ाना हैं..पता हैं क्यो.. वो जैसे ही इंटरव्यू के लिये ऑफिस में एंटर हुई... तो ....प्रिंसिपल ने पहला सवाल पूछा -अंग्रेजी में... आपकी की स्कूलिंग कहाँ से हुई हैं..जैसे ही मेघा ने अपने स...

'उड़ान ' एक नए आसमान की ओर...

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                       'उड़ान ' एक नए आसमान आज जब अनीश को सम्मानित किया जा रहा था तो कहीं भीड़ में बैठी अलीशा की आँखे छलक आयीं वो चाह कर भी उन आँसुओ को रुक न पायी,अनीश ने अलीशा से कहा था देखना एक दिन ये सब जो मुझसे मुँह फेरे खड़े हैं एक दिन मेरी सफलता पर खड़े होकर तालियां बाजयेंगे और देखो आज अनीश की अलीशा से कही बात सच हो गयी वैसे अनीश और अलीशा साथ तो नही है पर फिर भी जब अलीशा को ये पता चला कि आज अनीश को जिले के नेता जी अपने आलीशान आवास के पास बने हाल में सम्मनित करेंगे और हाल के अंदर जाने का कोई भी प्रवेश शुल्क नही है तो वो खुद को रुक नही पायी बस अनीश को खुश देखकर उसकी आँखों से अनीश के हिस्से के आँसू बहे तो फिर तब तक न रुके जब तक अनीश ने अलीशा के पास आकर उसके आँसुओ को अपने आँसू से रुक न दिया। 10 वर्ष पूर्व अनीश ने कंप्यूटर से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया फिर न जाने उसको कहाँ से फिल्मे बनाने की धुन सवार हो गयी उसने तये कर लिया अब वह फिल्मे बनाना सीखेगा बहुत खोज के बाद उसने कुछ पांच मास्टर लेवल की यूनिवर्सिटी ढूंढ निक...

"प्यार" ज़िंदगी की हद के पार

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प्या र  कब कहाँ और किससे हो जाये ये किसी को नही पता होता। ये कहानी है प्रियंक की जिसकी उम्र लगभग 19 वर्ष के आसपास होगी बचपन से हॉलीवुड की वो फिल्मे देखकर बड़ा हुआ है - जो  कहानी को भी हक़ीक़त बना देते है वहीं दूसरी तरफ बॉलीवुड की  ऐसी मसाला फिल्में जिनमें प्यार ऐसे परोसा जाता है जैसे किसी इंसान को ज़िन्दगी मिलने के दो ही मक़सद  है पहला इस दुनिया मे आना और दूसरा प्यार करके बॉलीवुड का नाम रौशन करना। और प्रियंक ने भी एक नाम रौशन करने वाला काम किया प्रियंक ने भी प्यार किया पर ऐसा प्यार जो दुनिया के  रीतिरिवाज़ों और  समाज के दायरे से बिल्कुल परे था। प्रियंक जिस उम्र में था वहां बचपन पीछे छूटता औऱ जवानी हाथ थाम कर जिंदगी के नए रंग दिखाने को बेताब होती है। आज प्रियंक के मन मे अजीब सी हलचल थी उसे ऐसा लग रहा था कि  उसे रिमझिम से प्यार हो गया है । जिससे वो रोज झगड़ता है, परेशान करता है  और कभी कभी अपने दिल की सारी बाते कह डालता है। कभी उससे गले लगकर घंटो, उसके साथ चुपचाप खड़ा रहता। अब आप इसे प्यार का कहो या दोस्ती का रिश्ता, रिमझिम भी प्रियंक को चुपच...

छल... कभी कभी अपने भी।

आज सब हैरान थे..रोहन को इस तरह देखकर, जो रोहन अपनी गाड़ी मे एक तिनका नही गिरने देता आज वो कीचड़ और धूल से लथपथ गाड़ी मे बैठा हुआ था। और न जाने किन खयालो मे डुबा था। तभी एकाएक शर्मा जी आये और कुछ पूछते रोहन गाड़ी से गुस्से मे उतरा और जोर से गाड़ी का दरवाजा बंद करता हुआ अंदर को ओर चला गया। सब हैरान थे सबके जहन मे बस एक ही सवाल कौंध रहा था आखिर रोहन को हुआ क्या है?? कल तो बड़े खुश मिजाज से दोस्तो के साथ घूमने जाने का प्लान बन रहा था, आखिर अचानक ऐसा क्या हुआ होगा रोहन के साथ जो अक्सर शांत और खुश मिजाज रहने वाले रोहन को इतना गुस्सा अ गया। रोहन अपने कमरे मे लेटा हुआ था की पापा और मम्मी जो की एक किट्टी पार्टी मे गये हुए थे वापस अ गये। जैसे ही मिस्टर महरा और मिसेस मेहरा अपनी गाड़ी से उतरे और रोहन की गाड़ी की हालत देखी उनसे रहा नही गया,वे दोनो जल्दी जल्दी रोहन के कमरे मे गये और रोहन से पूछने लगे- माँ-क्या हुआ बेटा रोहन आप ठीक तो हो न? पापा- आप तो अपनी गाड़ी को हमसे ज्यादा प्यार करते है फिर  गाड़ी का ये हाल?? रोहन ने आँसू भारी नज़रो से उनकी तरफ देखा और बस इतना पूछा कि आप लोगो की कभी श...