"प्यार" ज़िंदगी की हद के पार











प्यार कब कहाँ और किससे हो जाये ये किसी को नही पता होता।
ये कहानी है प्रियंक की जिसकी उम्र लगभग 19 वर्ष के आसपास होगी बचपन से हॉलीवुड की वो फिल्मे देखकर बड़ा हुआ है - जो  कहानी को भी हक़ीक़त बना देते है वहीं दूसरी तरफ बॉलीवुड की  ऐसी मसाला फिल्में जिनमें प्यार ऐसे परोसा जाता है जैसे किसी इंसान को ज़िन्दगी मिलने के दो ही मक़सद  है पहला इस दुनिया मे आना और दूसरा प्यार करके बॉलीवुड का नाम रौशन करना।
और प्रियंक ने भी एक नाम रौशन करने वाला काम किया प्रियंक ने भी प्यार किया पर ऐसा प्यार जो दुनिया के  रीतिरिवाज़ों और  समाज के दायरे से बिल्कुल परे था।
प्रियंक जिस उम्र में था वहां बचपन पीछे छूटता औऱ जवानी हाथ थाम कर जिंदगी के नए रंग दिखाने को बेताब होती है।
आज प्रियंक के मन मे अजीब सी हलचल थी उसे ऐसा लग रहा था कि  उसे रिमझिम से प्यार हो गया है ।
जिससे वो रोज झगड़ता है, परेशान करता है  और कभी कभी अपने दिल की सारी बाते कह डालता है। कभी उससे गले लगकर घंटो, उसके साथ चुपचाप खड़ा रहता।
अब आप इसे प्यार का कहो या दोस्ती का रिश्ता,
रिमझिम भी प्रियंक को चुपचाप घंटों खड़े होकर सुनती और जब प्रियंक उसे गले लगाकर खड़ा होता तो वो अपने घुघराले बालों को लहराकर अपनी खुशी का अहसास प्रियंक को कराती थी।
जब कभी प्रियंक उसे परेशान करता तो वो किसी पतझड़ में  पेड़ से झड़ते पत्तो की तरह रोने लगती थी कभी प्रियंक उसको गुस्से में कुछ कह भी देता तो दोनों में बहुत जल्दी सुलह हो जाती थी।
उनदोनों में प्यार गहरा होता जा रहा था  पर दोनों में से इस बात की ख़बर किसी को नही थी की वे दोनों प्यार में हैं।
लेकिन इस कहानी में एक विलेन भी था जिसे  उनदोनों की ये दोस्ती और प्यार रह रह कर खटक रहा था।
और खटकता भी क्यो न आख़िर रिमझिम बहुत खूबसूरत और घुघराले बालो  वाली लड़की थी  जिसे अपनी सुंदरता का घमंड था पर सिर्फ उनके लिये जो उसकी खुशी में ख़ुश नही थे, लेकिन प्रियंक पर तो जान छिड़कती थी जब भी कभी प्रियंक उससे मिलने आता वो बहुत नरम दिल से उसका स्वागत करती थी।
रिमझिम इतनी खूबसूरती थी की किसी का भी दिल उस पर आ जाये इसमे कोई दोराहे नही थी।
दोनो साथ में इतना अच्छा वक्त बिता रहे थे ये उस तिसरे इंसान(विलेन) को  बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था। उसने रिमझिम और प्रियंक की शिकायत उसके मम्मी पापा को बोल दी ... मम्मी पापा दूसरे ही दिन इतने गुस्से में आये (तब प्रियंक रिमझिम के पीठ से टेक लगाये बैठा था और अपने हाथ पीछे करके रिमझिम के हाथों को पकड़े हुआ था) और रिमझिम का हाथ प्रिंयक के हाथों से ऐसे खींचा जैसे कोई पेड़ को जमीन से अलग कर रहा हो और जैसे जैसे ये सब हो रहा था दोनों को वो बात समझ आ रही थी जो आज तक न तो प्रियंक औऱ न रिमझिम दोनो  में से कोई समझ सका था की वो हक़ीक़त में एक दूसरे से बहुत प्यार करते है।
और दोनों के मन मे बस यही चल रहा था-
"ये प्यार और गहरा होता गया,जैसे जैसे हम पर लोगो का पहरा होता गया ।।"
प्रियंक ने रिमझिम का हाथ छुड़ाते हुए बोला अंकल औऱ आंटी मैं जानता हूँ कि अभी मैं छोटा हूँ और अभी तो कॉलेज लाइफ शुरू ही कि है पर आप दोनों से वादा करता हूँ की मैं उम्र भर इसके साथ रहूंगा और इसको हर ख़तरे से लड़ना सिखाऊंगा बस आप हमदोनों को अलग मत कीजिये मैं बहुत ख्याल रखूँगा, रोज सुबह उठते ही इसके पास आ जाया करूँगा और शाम होते ही अपने घर चला जाऊँगा बस आप प्लीज हम दोनों को अभी अलग मत कीजिये क्योकि
मैं जानता हूँ अगर मैं नही रहा तो ये खिलखिलाना छोड़ देगी और न ही मदमस्त हवाओ के साथ झूमेगी सुबह तो होगी हर रात की पर शायद आज के बाद से इसकी सुबह न होगी ये सूरज की पहली किरण के साथ न उठेगी और न ही हर रोज की तरह निस्वार्थ होकर लोगो की सेवा करेगी ।
प्रियंक की ये बाते सुनकर तो उनकी आँखों मे पानी आ गया बोले बेटा अगर तुम्हारे जैसा प्यार हर कोई करे तो ये दुनिया न जाने कितनी खुबसूरत हो जाये अच्छा हम तुम्हारी बात मान लेते है और ये लो कुछ पैसे शायद तुम्हारे दोस्त को चोट या गयी है तुम इसका ध्यान रखना ये घाव भर जाएंगे हो सकें तो हमें माफ करना औऱ जो पैसे दिये है उससे तुम अपने और दोस्त बनाना और इस दुनिया को प्यार और दोस्ती के ऐसे ही रंगों से भर देना।
अरे, मैं तो प्रियंक और रिमझिम  के बारे में बताते बताते बाकी सब का परिचय कराना तो भूल ही गयी। रिमझिम और कोई नही बल्कि उसके घर से कुछ दूर पर खडा वो विशाल पेड़ है जिसके साथ साथ प्रियंक ने एक उम्र गुजारी हैं वो उम्र जो एक दोस्त की तलाश में होती है जिसे वो सब बात कह सके जो वो अपने मम्मी पापा से नही बोल सकता क्योंकि उनके पास प्रियंक को सुनने का टाइम नही है ,वो दोनों ही अपनी बेहतर जिंदगी को और भी  बेहतर बनाने में शायद ये भूल ही गये की उनका एक बेटा है जो उस उम्र में है जहाँ एक दोस्त की बहुत जरूरत होती हैं और ये लोग रहते भी ऐसी जगह है जहाँ  इंसान से ज्यादा पेड़ उगते है और आये दिन उतने ही पेड़ काट दिये जाते है प्रियंक बहुत शांत स्वभाव का लड़का है वो जल्दी सबसे नही घुलता मिलता और जिससे घुल जाये उसके सामने तो वो बच्चा ही बन जाता है।
उनदोनों के बीच मे तीसरा आदमी एक लालची आदमी है जो पेड़ो की देखरेख करता है और उनके बड़े हो जाने पर उन्हें शहर के बड़े कारखानों में बेच देता है प्रियंक की दोस्त के मम्मी पापा वो लोग  है जो दोनों तरफ से आरी पकड़ कर प्रियंक और रिमझिम को अलग कर रहे थे और वो अपने पत्ते गिरा कर अपना दुख जाहिर कर रही थी।
दोस्तो ये थी प्रियंक और रिमझिम की लव स्टोरी तो अब समझ गये न -
प्यार कब कहाँ और किससे हो जाये ये किसी को नही पता होता।।
प्रियंक ने कॉलेज की पढ़ाई खत्म होते ही एग्रीकल्चर में एडमिशन लिया और आगे जाकर फ़ॉरेस्ट गार्ड बन गया और अब उसका हस्ता खेलता हरा भरा एक परिवार हैं जिससे वो कभी दूर नही जाना चाहता।।
                                  - स्वाति


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