आख़िर कब तक
हम अगर चुप चाप सब सहन कर लेते है
तो ये मत समझो हम बिल्कुल ही सहनशील है
हम वक्त की नजाकत को समझते है शायद इसलिये ही हम तुम्हे माफ़ कर देते है...।
तो ये मत समझो हम बिल्कुल ही सहनशील है
हम वक्त की नजाकत को समझते है शायद इसलिये ही हम तुम्हे माफ़ कर देते है...।
आज नमिता ने कई साल बाद झल्लाते हुए
निलेश से आखिर बोल ही दिया जो उसके जहन
मे था...शादी के कुछ सालो बाद ही निलेश ने अपना ये रूप दिखा दिया था....निलेश को तो बस उसके जिस्म से प्यार था | ऑफिस से घर लौटते ही वो नमिता के साथ बत्तमीजी से बात करने लगता जब नमिता विरोध करती तो वो उससे कहता अपने मायेके चली जाओ चैन से रहोगी मैं भी अब तुम्हारा बोझ नही उठा प रहा हूँ... बस इस बात पर नमिता शांत हो जाती क्योकि घर वालो ने ही तो उसकी शादी जल्दी कर दी थी क्योकि उनके पास उसे आगे पढ़ाने के लिये पैसे नही थे पर शादी के लिये पूरा इंतजाम हो गया था...नमिता ने बहुत विनती भी की थी उनसे की वो कैसे भी पढ़ लेगी नौकरी करके और एक बार अपने पैरो पर खड़ी हो जाये फिर जहाँ चाहे उसकी शादी कर दे पर घर वाले उसकी एक न सुनने को तैयार थे..आज नमिता सोच रही थी की काश उसके घर वाले मान जाते तो इनकी बाते तो न सुननी पड़ती और मैं यहां से कही दूर जाके अपनी जिंदगी जी लेती..नमिता निलेश से बहुत परेशान हो चुकी थी इसलिये उसने सोच लिया अब कुछ भी हो इस कैद से बाहर निकलना है...इसीलिये उसने निलेश सुबह ही नसीहत दे दी थी की सुधर जाओ वरना मैं चली गयी तो कही के न रह जाओगे तुम । निलेश भी ऑफिस जाते हुए बोला जाओ जहां जाना है मुझे तुम्हारी कोई जारुरत नही है..नमिता पछता रही थी उसने बोल तो दिया है पर कहाँ जायेगी मायेके तो उसे जाना नही था..ससुराल गाँव मे था पर वहां भी जाकर क्या करेगी पर उसको बाहर निकलना है ये तो तये था फिर क्या नमिता ने अपना बैग पैक किया और कुछ पैसो की बचत की थी उसने उन पैसो को साथ लेकर घर छोड़ कर निकल गयी..उसे कुछ समझ नही अ रहा था कहाँ जाये, क्या करे एक दो दिन स्टेशन मे बीत गया रात बहुत डरावनी थी पर उसके पास कोई दूसरा रास्ता भी तो नही था..कुछ ने अकेली लड़की देखकर उसका फायदा उठाना भी चाहा पर नमिता होशियार थी..घर से निकलते वक़्त उसने साथ मे मिर्च वाला स्प्रे रख लिया था जो उसके बहुत काम आया..आज की रात कैसे गुजरेगी आज तो उसका स्प्रे भी खत्म हो गया वो बेंच पर सो रही थी अचानक कुछ लड़के वहां आये और उसे छेड़ने लगे वो चिल्ला रही थी गिड़ गिड़ा रही थी पर कोई सुनने वाला नही था अचानक ही एक औरत वहां आयी और नामिता को उन लोगो से बचा लिया और अपने साथ ले गयी उसे खाना दिया दूसरे दिन उसे अपने साथ नौकरी मे भी ले गयी जल्द ही नमिता सब सिख गयी और अपना किराये का घर भी ले लिया दूसरी तरफ निलेश की नामिता के बिन हालत खराब थी। उसने बहुत ढूंढा पर नमिता उसे न मिली , इधर नमिता ने क़ामयाबी की सीढ़ी भी चढ़ना शुरू कर दिया...जब उसके पास कुछ पैसे इकट्ठे हो गये तब उसे ध्यान आया की वो कैसे घर के फालतू समानो से माला, कंगन, झुमका सब बना लेती थी..इसी के साथ उसने खुद का छोटा स काम शुरू कर दिया पर कुछ ही दिनों मे उसका काम सराह भी जाने लगा फिर उसने ऑनलाइन साइट्स पर रजिस्ट्रेशन करा कर वहाँ भी खूब वाहवाही लूटी और ख़ूब पैसे कमा लिये अब नमिता को किसी की भी जरूरत नही थी क्योकि वो अपने पैरो पर खड़ी हो चुकी थी...आज नमिता सोच रही थी की उसने ये फ़ैसला पहले ले लिया होता तो शायद उसके दस साल और बच जाते जो उसने निलेश के साथ रहकर गवां दिये...फिर उसे याद आया की कई बार तो उसने सोचा की वो भाग जाये पर कोई डर था जो उसे निकलने नही देता था..शायद वो यही डर था के कही वो अपने काम मे सफल न हुई तो लोग क्या सोचेंगे,या फिर वो कहाँ रहेंगी क्या करेगी क्या खायेगी.||
लेकिन वो गलत थी,उसके पास दो रास्ते थे य तो वो अपनी पूरी जिंदगी उस आदमी के साथ बिता देती जिसके साथ वो पल भर भी नही रहना चाहती या वो घर से बाहर निकल जाती...मर तो वो वैसे भी रही थी..तो उसे लगा बाहर जाकर भी आज़मा ले। और उसके इस कदम ने उसकी जिंदगी बदल दी||
निलेश से आखिर बोल ही दिया जो उसके जहन
मे था...शादी के कुछ सालो बाद ही निलेश ने अपना ये रूप दिखा दिया था....निलेश को तो बस उसके जिस्म से प्यार था | ऑफिस से घर लौटते ही वो नमिता के साथ बत्तमीजी से बात करने लगता जब नमिता विरोध करती तो वो उससे कहता अपने मायेके चली जाओ चैन से रहोगी मैं भी अब तुम्हारा बोझ नही उठा प रहा हूँ... बस इस बात पर नमिता शांत हो जाती क्योकि घर वालो ने ही तो उसकी शादी जल्दी कर दी थी क्योकि उनके पास उसे आगे पढ़ाने के लिये पैसे नही थे पर शादी के लिये पूरा इंतजाम हो गया था...नमिता ने बहुत विनती भी की थी उनसे की वो कैसे भी पढ़ लेगी नौकरी करके और एक बार अपने पैरो पर खड़ी हो जाये फिर जहाँ चाहे उसकी शादी कर दे पर घर वाले उसकी एक न सुनने को तैयार थे..आज नमिता सोच रही थी की काश उसके घर वाले मान जाते तो इनकी बाते तो न सुननी पड़ती और मैं यहां से कही दूर जाके अपनी जिंदगी जी लेती..नमिता निलेश से बहुत परेशान हो चुकी थी इसलिये उसने सोच लिया अब कुछ भी हो इस कैद से बाहर निकलना है...इसीलिये उसने निलेश सुबह ही नसीहत दे दी थी की सुधर जाओ वरना मैं चली गयी तो कही के न रह जाओगे तुम । निलेश भी ऑफिस जाते हुए बोला जाओ जहां जाना है मुझे तुम्हारी कोई जारुरत नही है..नमिता पछता रही थी उसने बोल तो दिया है पर कहाँ जायेगी मायेके तो उसे जाना नही था..ससुराल गाँव मे था पर वहां भी जाकर क्या करेगी पर उसको बाहर निकलना है ये तो तये था फिर क्या नमिता ने अपना बैग पैक किया और कुछ पैसो की बचत की थी उसने उन पैसो को साथ लेकर घर छोड़ कर निकल गयी..उसे कुछ समझ नही अ रहा था कहाँ जाये, क्या करे एक दो दिन स्टेशन मे बीत गया रात बहुत डरावनी थी पर उसके पास कोई दूसरा रास्ता भी तो नही था..कुछ ने अकेली लड़की देखकर उसका फायदा उठाना भी चाहा पर नमिता होशियार थी..घर से निकलते वक़्त उसने साथ मे मिर्च वाला स्प्रे रख लिया था जो उसके बहुत काम आया..आज की रात कैसे गुजरेगी आज तो उसका स्प्रे भी खत्म हो गया वो बेंच पर सो रही थी अचानक कुछ लड़के वहां आये और उसे छेड़ने लगे वो चिल्ला रही थी गिड़ गिड़ा रही थी पर कोई सुनने वाला नही था अचानक ही एक औरत वहां आयी और नामिता को उन लोगो से बचा लिया और अपने साथ ले गयी उसे खाना दिया दूसरे दिन उसे अपने साथ नौकरी मे भी ले गयी जल्द ही नमिता सब सिख गयी और अपना किराये का घर भी ले लिया दूसरी तरफ निलेश की नामिता के बिन हालत खराब थी। उसने बहुत ढूंढा पर नमिता उसे न मिली , इधर नमिता ने क़ामयाबी की सीढ़ी भी चढ़ना शुरू कर दिया...जब उसके पास कुछ पैसे इकट्ठे हो गये तब उसे ध्यान आया की वो कैसे घर के फालतू समानो से माला, कंगन, झुमका सब बना लेती थी..इसी के साथ उसने खुद का छोटा स काम शुरू कर दिया पर कुछ ही दिनों मे उसका काम सराह भी जाने लगा फिर उसने ऑनलाइन साइट्स पर रजिस्ट्रेशन करा कर वहाँ भी खूब वाहवाही लूटी और ख़ूब पैसे कमा लिये अब नमिता को किसी की भी जरूरत नही थी क्योकि वो अपने पैरो पर खड़ी हो चुकी थी...आज नमिता सोच रही थी की उसने ये फ़ैसला पहले ले लिया होता तो शायद उसके दस साल और बच जाते जो उसने निलेश के साथ रहकर गवां दिये...फिर उसे याद आया की कई बार तो उसने सोचा की वो भाग जाये पर कोई डर था जो उसे निकलने नही देता था..शायद वो यही डर था के कही वो अपने काम मे सफल न हुई तो लोग क्या सोचेंगे,या फिर वो कहाँ रहेंगी क्या करेगी क्या खायेगी.||
लेकिन वो गलत थी,उसके पास दो रास्ते थे य तो वो अपनी पूरी जिंदगी उस आदमी के साथ बिता देती जिसके साथ वो पल भर भी नही रहना चाहती या वो घर से बाहर निकल जाती...मर तो वो वैसे भी रही थी..तो उसे लगा बाहर जाकर भी आज़मा ले। और उसके इस कदम ने उसकी जिंदगी बदल दी||
स्वाति....
कहानी पढ़ने के लिए धन्यवाद अशा करती हूँ आपको कहानी पसंद आएगी आप मुझे प्रतिलिपि or your quote पर पढ़ सकते है।।
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