"अरमान और परिवार" भाग -4

                      "अरमान और परिवार"



फेसबुक में एक दिन अरमान का मैसेज आया, रिद्धिमा ने फॉर्मेलिटी पूरी करने के लिये रिप्लाई दे दिया....कुछ देर नॉर्मल हाय, हेलो हुआ और फिर रिद्धिमा अपने काम पर लग गई, उसे चैटिंग करना बिल्कुल नही पसंद था, वो भी ऐसे लोगो से जिन्हें वह पर्सनली न जानती हो...और दूसरी तरफ वो अर्पित से चैटिंग कर रही थी...

अरमान ने भी किसी गलत इरादे से मैसेज नही किया था, वो तो बस एक दोस्त ढूढ़ रहा था, जिससे वो बात कर सके उस टाइम अरमान बहुत टूटा हुआ था, उसके घर में कुछ अविश्वनीय  घटित हो जाने के कारण।

कभी कभी हम अपने बनाये उसूलो को भी भूल जाते है रिद्धिमा इस वक़्त यही कर रही थी एक तरफ उसे किसी अनजान से बात करना पसंद नही था दूसरी तरफ वो एक अनजान लड़के के साथ बाते करके सपनो की दुनिया में खो रही थी।

अरमान के परिवार में पाँच लोग है, अरमान घर में सबसे छोटा और नटखट हुआ करता था लेकिन जैसे जैसे बड़ा हुआ जिम्मेदारियों ने उसे उम्र से भी ज्यादा बड़ा कर दिया।

अरमान की माँ उसे बहुत प्यार करती थी और पापा तो बस पिटाई लगाया करते थे, एक बड़े भईया थे जो बचपन में तो अरमान को प्यार किया करते थे, लेकिन जैसे जैसे वो बड़े हुए, जिम्मेदारियां बढ़ी और कुछ कारणों की वजह से उनकी नौकरी भी नही लग पाई, वो बहुत गुस्सैल मिजाज के हो गये।

पापा बिजनेस मैन थे, उन्हें बिजनेस में अचानक घटा होने लगा और हँसते खेलते परिवार में ग़मो का पहाड़ टूट गया, बड़े भईया की पढ़ायी में पानी की तरह पैसा बहा, जब तक अरमान की बारी आई सब कुछ खत्म हो चुका था, अरमान अब छोटे मोटे ट्यूशन देकर अपना खर्चा निकाला करता था, बाक़ी दादी की पेंशन थी, जिससे घर चलता था, अरमान के पापा ने धीरे धीरे करके कमना छोड़ दिया, भईया ने शर्म की वजह से घर से बाहर निकलना छोड़ दिया,घर की 50% जिम्मेदारी अरमान के सर पर आ गई और अरमान ने अपने सपनो से मुँह मोड़ लिया, उसका अब बस एक ही लक्ष्य था सरकारी नौकरी उसे पता था एक इस लक्ष्य को पाने में यादि वह सफल हो गया तो सब ठीक हो जायेगा।

वह अपने लक्ष्य को पाने के लिए सब कुछ भूल के बैठा था, इसी बीच ख़बर मिली की उसकी बुआ के बेटे ने सुसाइड कर ली है,इस घटना ने अरमान को अंदर से तोड़ दिया था, उसके मुताबिक़ भानू ने आख़िरी बार उसे ही कॉल की थी लेकिन वह पढ़ने में इतना व्यस्त था की फोन ही नही उठा पाया और कुछ देर बाद यह ख़बर आ गई।

भानू अरमान की बुआ का बेटा और अरमान का छोटा भाई ये दोनो भी अरमान के बहुत करीब थे, बुआ जी तो सबकी प्यारी थी और सबकी दोस्त भी फिर चाहें वो रिशू उनका बड़ा बेटा, भानू उनका छोटा बेटा, अरमान के बड़े भईया और अरमान खुद भी घर के सारे लड़के बुआ जी को अपने सारे सीक्रेट्स शेयर करते थे बुआ जी को सबकी गर्लफ्रेंड के नाम पता हुआ करते थे।

अरमान ने रिद्धिमा से भानू के चले जाने के बाद से ही बात करने की कोशिश की थी क्योंकि वह बहुत अकेला हो चुका था, सारे सगे संबंधियों ने अरमान के परिवार का ये हाल देखकर मुँह मोड़ लिया था अब न कोई सुनता था उनकी और न ही कोई अपनी सुनाने आता था, बुआ के सिवा....।


इधर रिद्धिमा के फाइनल ईयर के एग्जाम करीब आ रहे थे वह अरमान से की गई दोस्तो इस वक़्त बहुत काम आई उसने लास्ट ईयर का अपना प्रोजेक्ट रिद्धिमा को दे दिया क्योकि उसने इसकी जगह दूसरा प्रोजेक्ट सबमिट किया था और रिद्धिमा की हर तरह से मदद करने लगा, लेकिन रिद्धिमा तो अरमान से बस काम निकलवा रही थी वह अरमान से सिर्फ काम के सिलसिले में बात किया करती थी, एक दिन अरमान उसकी इस आदत से परेशान हो गया...

रिद्धिमा को मैसेज करके कहा तुम एक मतलबी लड़कीं हो, तुम बस काम के लिये ही मुझे याद करती हो नही तो इग्नोर कर देती हो...

रिद्धिमा को कोई ऐसे बोले रिद्धिमा को मंजूर नही था, उसने अरमान को व्हाट्स ऐप पर रिप्लाई दिया बहुत पोलिटेली क्योकि गलती रिद्धिमा की थी और वह जानती थी की वाकई  में वह ऐसा कर रही है, हां अरमान बोलो क्या बात करूँ मैं तुमसे, मैं तुम्हे मिली तक नही हूँ और जानती भी नही हूँ अच्छे से क्या बात करूँ तुमसे??....उसके बाद दोनो के बीच में थोड़ी बहुत बात हुई, लेकिन रिद्धिमा अब अरमान से बात करने लगी थी रोज जब अरमान सारा दिन ट्यूशन पढ़ के और पढ़ा कर रात में फ्री होता तो रिद्धिमा से थोड़ी बहुत बात होती थी, रिद्धिमा के एग्जाम शुरू हो गये, शुरूआती एग्जाम बहुत अच्छे गये लेकिन एक एग्जाम बिगड़ गया घर आते ही उसने अरमान को कॉल किया और बोली मैं एक बार और फेल नही होना चाहती और रोने लगी अरमान ने उसे समझाया की अभी इसका एक पेपर और है उसको अच्छे से करो, मैं तुम्हारी पूरी हेल्प करूँगा तुम फेल नही होगी.....

फिर क्या था अरमान की बातो से रिद्धिमा में जोश आ गया उसने बहुत अच्छे से पढ़ाई की अगला पेपर ठीक हो गया अब रिद्धिमा के सर से फेल होने का डर निकल गया था....

स्वाति की कलम से- "अरमान और परिवार"

**************(पहली मुलाक़ात का चौथा भाग)*************

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