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अंजली की अन - जली ख्वाहिश

7."अंजली की अन-जली ख़्वाहिश" भागो ! भागो! भागो! आग, आग, आग लगी है पास वाली बिल्डिंग में आग लग गईं है। आस पास के कुछ लोग आग बुझाने की कोशिश कर रहे थे तो कुछ लोग अपने ज़रूरी काग़ज़ात को सुरक्षित जगह में पहुंचाने की कोशिश कर रहे थे। तभी आग से लिपटी एक लड़की दूसरे फ्लोर से कूद गई लोगों ने उसको बचाने की कोशिश की लेकिन वह आग की लपटों और जलते शरीर से ख़ुद को बचाने की कोशिश में इधर से उधर भाग रही थी लोगों ने उसके ऊपर कंबल फेकने तो कभी पानी डालने की बहुत कोशिश की लेकिन उसको बचा नहीं पाये और उस लड़की ने तड़पते हुए वहीं दम तोड़ दिया। थोड़ी देर में एक एम्बुलेंस और फायरब्रिगेड की गाड़ी हॉर्न बजाते हुए घटना स्थल पर पहुंचे और जल्द ही आग पर काबू पा लिया। एम्बुलेंस और फायरब्रिगेड  की ये चंद लम्हों कि लापरवाहीं ने करीबन 12 बच्चो की जान ले ली वे सभी आईआईटी की कोचिंग करने कोटा, रजिस्थान अपने और अपने घरों से मीलों दूर आये हुए थे। सन् 1995 - "कोटा जीनियस क्लासेस " ,आईआईटी , यूपीटीयू, ऐम्स, नीट जैसे  सभी विश्वस्तरीय प्रवेश परीक्षा की तैयारी कराने के लिए फेमस था। दूर दूर से लोग यहां अपने बच...

शापित क़ब्रिस्तान

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                                            "शापित कब्रिस्तान" बुधवार की रात सन् 2000, इक्कीसवीं सदी कलयुग!! दाफनाओ ! दफनाओं! जल्दी ,जल्दी करो , अरे ! हटो किनारेे, तुम लोगो से एक छोटा सा काम भी नहीं हो सकता, शायद ये दिन देखने के लिए ही तुम लोगो को खिला पिला के बलवान बनाया था मैंने.. सुरेश, तुम बायी ओर नज़र रखना कोई आ तो नहीं रहा, रमेश तुम दायी ओर देखना , कल्लू तू सामने देख कोई आ न जाए, तब तक मैं इन तीनों को ठिकाने लगाता हूं।  अभिवंश ने उस रात तीन जिंदा इंसान को उस ज़मीन में दफना दिया कहा जाता है उन तीनों की आत्मा बुधवार के दिन महीने कि  दूसरी तारीख़ को आज भी वहां भटकती है और उस ज़मीन को खोदने की गुहार लगाती हैं और तीन लोगों के सुर एक साथ कहते है - हम तीन जिंदा मानस, बिना किसी अपराध, दफ़न किये गए उस रात।। अभिवंश के इस अपराध को कोई नही जान पाया और कुछ साल बाद अभिवंश की एक कार ऐक्सिडेंट में मौत हो गई। सुरेश , रमेश और कल्लू को लगा अभिवंश के उस कार एक्सिडेंट के पीछे उन तीनो...

एक काली परछाई

3."एक काली परछाई" मिनी और राहुल आज अपनी शादी की पाँचवी सालगिरह बनाने एक रिसॉर्ट में आये हुए हैं। उनके साथ , उनके कुछ करीबी दोस्त भी है, रिसॉर्ट राहुल के अंकल का है उन्होंने इस रिसॉर्ट को करोड़ो रुपये ख़र्च करके खरीद था फिर अचानक से यहाँ आना बंद कर दिया। राहुल के पूछने पर भी उन्होंने कुछ नही बताया परंतु राहुल के फ़ोर्स करने पर अंकल ने बताया की वहां एक काली परछाई  है जो उस रिसॉर्ट को अपने कब्ज़े में कर चुकी है, पहले मैं वहाँ अपना क्वालिटी टाइम स्पेंट करता था,लेकिन एक रात मैंने उसे देखा...  उसका अक्स कहीं नहीं था सिर्फ़ उसकी परछाई मेरे नज़रो के सामने ठहल रही थी , उसके चलने के ढंग से ऐसा लग रहा था वह किसी का इंतज़ार कर रही हो, मैं जब तक जागता रहा वह मुझे दीवार पर टहलती हुई नज़र आयी,मैने आज तक, किसी को इस बारे में नही बताया मुझे लगा या तो वो मेरा वहम है औऱ अगर हकीकत है तो, मेरे पास कोई सबूत नही है, कहीं लोग मुझे पागल न समझे इस डर से मैन वहां जाना बंद कर दिया। मैंने जिस दलाल के जरिये उस रिसॉर्ट को खरीदा था उसे इस बात का पता था वह ये रिसॉर्ट मुझे बेचकर विदेश में बस गया.... अंकल आप मुझे रिस...

एक्सपेंसिव कैमरा

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                        "एक्सपेंसिव कैमरा" मयूरी को फोटोग्राफी का बहुत शौक था बचपन से ही, आज मयूरी का जन्मदिन था,और उसके लिए कैमरे से बड़ा कोई और उपहार हो ही नही सकता था। मयूरी के बड़े भाई पानी वाले जहाज में कैप्टन हुआ करते थे, उन्होंने मयूरी की फोटोग्राफी से प्रेरित होकर उसे एक नया कैमरा उपहार देने की सोची और अपने एक दोस्त के ज़रिए विदेश से मयूरी के लिए एक कैमरा मँगवाया ऑटोमैटिक कैमरा, वह कैमरा इतना एक्सपेंसिव था कि आज के डिजिटल कैमरे भी उसके आगे फेल थे। रात में जब रवि ने मयूरी को कैमरा गिफ़्ट किया तो वह खुशी के मारे मानो पागल ही हो गई हो... सबने मयूरी से कहा, की वह अपने नये कैमरे से सबकी फ़ोटो खींचे लेकिन मयूरी ने नये कैमरा को ये बोलकर टाल दिया कि वह अभी कुछ ठीक से जानती नही इसके बारे में, मयूरी ने जल्दी से  अपना पुराना कैमरा सेट किया और एक फ़ैमिली फोटो क्लिक की... घर में पार्टी का मौहाल था कुछ लोग मेहमानों के स्वागत में लगे हुए थे, तो कुछ पार्टी का भरपूर लुत्फ उठा रहे थे, इतने में मयूरी को उसके दोस्त पकड़ कर घर के पास वाल...

"भूतिया हाईवे"

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1.  "भूतिया हाइवे" कहते है इंसान मृत्यु के पश्चात अपने कर्म के अनुसार नई योनि में जन्म लेता है। अरमान की ट्रेन टिकट कन्फर्म नहीं न हो पाने के कारण अरमान ने तय किया कि वह दिल्ली से राजस्थान का सफ़र आज रात कार से ही तय करेगा। अरमान ने बैग पैक किया अपनी छोटी सी बच्ची के माथे को चूमा और अपनी प्यारी सी वाइफ से अलविदा कह कर कार में बैठ गया,  मुन्नी पीछे से दौड़ती हुई अाई पापा, पापा मेरे लिए ढेर सारी चॉकलेट लेकर आना। हां बेटा मै आपके लिए ढेर सारी चॉकलेट लाऊंगा पहले आप मुझे प्यारी सी किस्सी दो - उम्म्म अह , ओके पापा! अब आप खुश हुए ना, बाय, हैप्पी जर्नी जल्दी से वापस आना । रिद्धिमा एक कोने में खड़ी होकर ये सब देख कर मुस्कुरा रही थी, तभी अचानक से उसे पीछे से आवाज़ - आई रोक लो उसे, वहां खतरा है,रिद्धिमा जैसे ही पीछे मुड़ी तो वहां कोई नहीं था। रिद्धिमा तुरंत घर के अंदर आयीं अरमान को फोन लगाया और उसे रात में जाने से मना किया, अरमान के कारण पूछने पर रिद्धिमा ने उसे सारी बाते बताई। अरमान - रिद्धिमा तुम भी क्या बच्चो जैसी बाते कर रही हो, अच्छा ये बताओ, जब कल मै जल्दी सो गया था तो तुम क्या कर...

आख़िर कब तक

हम अगर चुप चाप सब सहन कर लेते है तो ये मत समझो हम बिल्कुल ही सहनशील है हम वक्त की नजाकत को समझते है शायद इसलिये ही हम तुम्हे माफ़ कर देते है...। आज नमिता ने कई साल बाद झल्लाते हुए निलेश से आखिर बोल ही दिया जो उसके जहन मे था...शादी के कुछ सालो बाद ही निलेश ने अपना ये रूप दिखा दिया था....निलेश को तो बस उसके जिस्म से प्यार था | ऑफिस से घर लौटते ही वो नमिता के साथ बत्तमीजी से बात करने लगता जब नमिता विरोध करती तो वो उससे कहता अपने मायेके चली जाओ चैन से रहोगी मैं भी अब तुम्हारा बोझ नही उठा प रहा हूँ... बस इस बात पर नमिता शांत हो जाती क्योकि घर वालो ने ही तो उसकी शादी जल्दी कर दी थी क्योकि उनके पास उसे आगे पढ़ाने के लिये पैसे नही थे पर शादी के लिये पूरा इंतजाम हो गया था...नमिता ने बहुत विनती भी की थी उनसे की वो कैसे भी पढ़ लेगी नौकरी करके और एक बार अपने पैरो पर खड़ी हो जाये फिर जहाँ चाहे उसकी शादी कर दे पर घर वाले उसकी एक न सुनने को तैयार थे..आज नमिता सोच रही थी की काश उसके घर वाले मान जाते तो इनकी बाते तो न सुननी पड़ती और मैं यहां से कही दूर जाके अपनी जिंदगी जी लेती..नमिता निलेश से बहुत...

लव@ट्रेन

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आज गरिमा पापा के साथ इलाहबाद ज रही थी... उसने सोचा भी नही था उसे उसका पहला प्यार ट्रेन मे मिलेगा। सुबह 6 बजे की ट्रेन थी। पापा ने रास्ते से कुछ फल लिये और गरिमा ने एक न्यूज़ पपेर.....ट्रेन की बोगी मे चार लोगों वाली सीट मे गरिमा बैठी और खिड़की वाली सीट मे उसके पापा बैठ गये। ट्रेन अपने गन्तव्य के लिये रवाना हो गयी..... उस बोगी मे तीन चार खिड़की वाली सीट छोड़कर कुछ लड़के बैठे थे,जो कानपुर मे रह रहे थे और त्योहार मनाने अपने घर इलाहबाद ज रहे थे। गरिमा की नज़र एक लड़के पर पड़ी जो मोटा तो था और बिल्कुल भी आकर्षक नही था...अतः गरिमा की नज़र जिस तरह घूमते हुए उस लड़के तक गयी थी वैसे ही घूमते हुए वापस अ गयी। सफ़र शुरू हुए एक घंटे गुज़र चुके थे..कुछ देर बाद गरिमा की नज़र फिर उस तरफ गयी इसबार एक खूबसूरत स लड़का उस सीट पर बैठा था...जो खुद भी गरिमा की तरफ ही देख रहा था...अब गरिमा की आँखे परेशा न हो गयी...पहले तो वो समझ न पायी इस क्रिया की क्या प्रतिक्रिया दे। फिर कुछ देर बाद गरिमा भी उसकी ओर देखने लगी....और देखते ही देखते न जाने कब आँखे चार हो गयी प्रिया का खुद पर कंट्रोल न रहा था...वो चाह रही थी ये...