'उड़ान ' एक नए आसमान की ओर...

                       'उड़ान ' एक नए आसमान


आज जब अनीश को सम्मानित किया जा रहा था तो कहीं भीड़ में बैठी अलीशा की आँखे छलक आयीं वो चाह कर भी उन आँसुओ को रुक न पायी,अनीश ने अलीशा से कहा था देखना एक दिन ये सब जो मुझसे मुँह फेरे खड़े हैं एक दिन मेरी सफलता पर खड़े होकर तालियां बाजयेंगे और देखो आज अनीश की अलीशा से कही बात सच हो गयी वैसे अनीश और अलीशा साथ तो नही है पर फिर भी जब अलीशा को ये पता चला कि आज अनीश को जिले के नेता जी अपने आलीशान आवास के पास बने हाल में सम्मनित करेंगे और हाल के अंदर जाने का कोई भी प्रवेश शुल्क नही है तो वो खुद को रुक नही पायी बस अनीश को खुश देखकर उसकी आँखों से अनीश के हिस्से के आँसू बहे तो फिर तब तक न रुके जब तक अनीश ने अलीशा के पास आकर उसके आँसुओ को अपने आँसू से रुक न दिया।

10 वर्ष पूर्व

अनीश ने कंप्यूटर से अपना ग्रेजुएशन पूरा किया फिर न जाने उसको कहाँ से फिल्मे बनाने की धुन सवार हो गयी उसने तये कर लिया अब वह फिल्मे बनाना सीखेगा बहुत खोज के बाद उसने कुछ पांच मास्टर लेवल की यूनिवर्सिटी ढूंढ निकाली जो फिल्मे बनाने के तकनीकी पहलुओं को समझाती औऱ छात्रों को इतना सछम बना देती की उनकी यूनिवर्सिटी से पास आउट होने के बाद अगर कोई छात्र वाकई थोड़ा बहुत संघर्ष कर  ले तो उसका जीवन सफल समझो  | 
अनीश ने तये किया था उसको उन पांच सस्थानों से किसी एक में  प्रवेश लेना है परतुं किसी फिल्म स्कूल में दाखिला लेना थोड़ा सा मुश्किल होता है संस्थान द्वारा लिये जाने वाले शुल्क के कारण, अनीश के लिये सबसे बड़ी मुश्किल थी पैसे ! लेकिन उसने तो ठान लिया था न उसको करना है तो करना है| अनीश बचपन से ही ज़िद्दी किस्म का लड़का था वो किसी सफर में निकलने से पहले सफर की  मुसीबातों को नहीं देखता था , उसका जिंदगी  जीने  के  बारे में एक मत था  रास्ता कोई भी हो मंज़िल की तरफ ही जाता है और रास्ते में आने वाली मुसीबत बताती है सफर कितना रोमांचक होने वाला है, वो अक्सर इन लाइनों को किसी भी सफर में निकलने से पूर्व दोहराता था|  
वही दूसरी तरफ अलीशा अनीश से बिलकुल अलग उसकी जिंदगी की फिलॉसफी अनीश से अलग थी|
अलीशा और अनीश ने एक ही कॉलेज से ग्रेजुएशन किया लेकिन अनिशा और अनीश एक दूसरे को जानते नही थे क्योंकि उनके दोस्तों का समूह अलग अलग था।
वही दूसरी तरफ अलीशा जिसका जिंदगी जीने का अलग ही तरीका है  और उसकी लाइफ फिलॉसफी अनीश से बिल्कुल अलग है|
अलीशा और अनीश ने एक ही कॉलेज से ग्रेजुएशन किया लेकिन अलीशा और अनीश एक दूसरे को जानते नही थे क्योकि दोनों के दोस्तो का समूह तीन वर्ष तक अलग ही रहा
फिलहाल अलीशा का भी ग्रेजुएशन हो गया था और आगे उसने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी थी।
अनीश और अलीशा की मुलाक़ात गेट टूगेदर में हुई जब दो वर्ष बाद कॉलेज के ही बच्चो ने मिलकर एक गेट टूगेदर ऑर्गनाइज किया।
वही अलीशा और अनीश में कुछ देर बातें हुई थी अलीशा अनीश की बातों से प्रभावित थी उसका जिंदगी जीने का तरीका उसकी फिलॉसफी और सारे साथियों से हटकर लिया गया फैसला- अरे वही फ़िल्म मेकिंग का तो ऐसे मुलाकात हुई अनीश और अलीशा की...
अब एक तरफ अनीश का कैरियर था तो दूसरी तरफ अलीशा थी उनदोनों को पता नही चला कब दोस्ती निभाते निभाते प्यार में पड़ गये।
अलीशा अपने बिजी शेड्यूल से वक़्त निकेलकर अनीश से मिलने जाती वही अनीश भी अपना काम छोड़कर अलीशा से मिलने आता था औऱ ये मुलाक़ात धीरे धीरे नज़दीकियों में तब्दील हो गयी प्यार परवान चढ़ रहा था दुनिया की फिक्र किये बग़ैर।

अनीश का संघर्ष

प्यार तो हो गया औऱ परवान भी चढ़ गया अब बात है सफर की हौसलो की और अनीश द्वारा लिए गये फैसले की
अनीश ने पहली बार में ही पुणे स्थित फ़िल्म संस्थान की प्रवेश परीक्षा पास कर ली परतुं दाखिला न ले पाया क्योकि उसके पास इतने पैसे उस वक़्त नही थे की वो संस्थान की फीस जमा कर पाये उस वक़्त  वो खुद ही कमाता था औऱ अपने खर्चे चलता था अलीशा ने भी अपनी तरफ से पूरी
कोशिश की लेकिन अनीशा की कोई मदद न कर पाई , अनीश को अपने सपनों से एक कदम पीछे हटना पड़ा लेकिन अनीश का हौसला अभी टूटा नही था, उसकी उम्र 23 वर्ष थी जब वो जान गया था संघर्ष क्या है पहली दफा अनीश का पैसो की वजह से दाख़िल रुक जाना उसके लिये बहुत बड़ा सदमा था लेकिन उसने ठान जो ली थी... और फ़िल्म मेकिंग को जिंदगी का मक़सद बना लिया था जब चंद रुपयों की वजह से ये हुआ था तो अनीश ने सिर्फ एक लाइन बोली मुकाबला रोमांचक है मजा आएगा... उसका ये सकारात्मक रवैये उसको कभी दगा नही देगा उसको विशवास था।
अब दो वर्ष बीत चुके है अनीश ने सुबह न्यूज़ पेपर डिस्ट्रीब्यूट करना शुरू कर दिया और दोपहर का वक़्त वो फिल्मो की किताबें पढ़ने में लगाता। शाम को वो रेस्तरां में वेटर का काम करने लगा था रात के कुछ पल अलीशा के साथ फोन पर ही गुजर रहे थे  सब बढ़िया चल रहा था औऱ ये भी कह सकते है कि वो किसी से कहना नही चाहता था उसके दिल मे जो कसक थी अलीशा से भी नही , वह बस कमाता चला जा रहा था अपने सपनों को पूरा करने के लिये अनीश ने  दो वर्ष में  करीब 20,000/- की सेविंग्स की अलीशा भी अनीश के साथ ही रही उस कठिन दौर में दोनों एक दूसरे से बेहद प्यार करते थे और सहारा थे एक दूसरे का अलीशा गवर्नमेंट जॉब की तैयारी कर रही थी और अनीश को पैसे कमाने की धुन सवार हो गयी थी कई दफा अलीशा ने बोला कि पैसे कमा चुके हो तो किसी संस्थान में दाखिला ले लो फिर सीखते भी रहना औऱ कमाते भी रहना और मैं तो हूँ ही तुम्हारे साथ मैं जल्द ही नौकरी पा जाऊँगी फिर कोई दिक्कत न होगी , लेकिन अनीश दोबारा उस संस्थान का फॉर्म नही डाला शायद उसका मन हट गया था।
एक दिन शाम को अनीश नेट सर्फ़िंग कर रहा था तो उसको एक  शार्ट टर्म फ़िल्म मेकिंग कोर्स के बारे में पता चला उसकी
कोर्स की फीस भी ज्यादा नही थी अनीश के बजट में थी।
अनीश  तुरंत अलीशा के पास गया औऱ अलीशा को ये बात बताई तो वह खुश तो हुई पर बोली जो भी काम करना पूरा मन लगा कर करना और इतना कहते ही अनीश को किस कर लिया औऱ फ़िर टाइट हग किया औऱ बोला अब तुम जाओ ये तीन महीने के लिए काफ़ी है मैं काम चला लूँगी अनीश ने मुस्कुरा कर अलीशा को देखा और आंखों ही आँखों मे न जाने क्या इशारे हो गये
अनीश ने सत्यजीत रे फ़िल्म संस्थान के आंध्र प्रदेश में होने वाले तीन महीने के शार्ट टर्म कोर्स से फ़िल्म बनाने के सभी तकनीकी तरीक़े सिख लिये, और संस्थान के अन्य सभी छात्रों ने तये किया कि वे मुम्बई में रहेंगे और वही कुछ काम ढूँढेंगे लेकिन अनीश ने मना कर दिया क्योंकि एक बार फिर उसके पास पैसे खत्म हो गए थे ।
अनीश अपने शहर वापस अ गया और तये किया कि यही रहकर अपनी पहली फ़िल्म बनायेगा पहले पैसे जोड़ेगा और फिर उससे एक शार्ट फ़िल्म बनायेगा। एक शर्ट फ़िल्म बनाने में लगभग 5000 से 10,000 हज़ार का खर्चा तो अ ही जाता है अतः उसने वही पुराने काम अख़बार बेचना रेस्टोरेंट में वेटर का काम शूरु कर दिया लेकिन अब अनीश पहले से ज्यादा व्यस्त और उदास रहने लगा था अब वो अलीशा को भी वक़्त नही दे पा रहा था अनीश के आने की ख़बर अलीशा को लगी तो उसने मिलने  कोशिश तो की लेकिन अनीश ने मना कर दिया औऱ कहा मुझे अकेला छोड़ दो मैं न किसी से मिलना चाहता हूँ औऱ न ही बात करना चाहता हूँ।
अलीशा को अनीश का ये रवैया बिल्कुल भी पसंद न आया उसने बस अनीश की बात मानकर ख़ुद को समझा लिया वही दूसरी तरफ अनीश दुनिया दरी भूल कर बस अपने सपने को पूरा करने और उसके लिये पैसे कमाने मे लगा रहा , वो पूरा दिन काम करता कुछ घण्टे सोता और बचा हुआ टाइम फ़िल्म से जुड़ी किताबे पढ़ने में लगाता था वो जैसे भुल ही गया उसकी जिंदगी में अलीशा नाम का भी कोई हैं।
अलीशा का अनीश की जिंदगी में पुनः प्रवेश
अनीश खो चुका था अपनी ही उलझती जिंदगी में उसे जो धुन सवार थी जो उसे कहीं औऱ सर उठा कर देखने की इजाजत नही दे रही थी।
दूसरी तरफ अलीशा अनीश के इस व्यवहार से परेशान हो चुकी थी लेकिन अनीश को खोना नही चाहती थी इसलिए अपनी नयी नौकरी की परवाह किये बिना अनीश के साथ आकर रहने लगी अनीश का पता रेस्तरां से मिला जहाँ वो पार्ट टाइम जॉब करता था।
लेकिन अनीश को कुछ भी होश नही था वो घर आता किताबे पढ़ता सुबह की भोर से पहले ही अखबार बेचने निकल जाता और उसके बाद रेस्तरां चला जाता और फिर दूसरे दिन का वही सड्यूले पहले तो अलीशा को कुछ समझ नही आया क्या करें लेकिन जल्द ही उसने इस समस्या से बाहर निकलने का रास्ता ढूंढ लिया।
अब जब अनीश घर आता तो अलीशा कोई एक फ़िल्म जो अपने समय की हिट हो लगा कर बैठ जाती अनीश आते ही फ़िल्म देखने बैठ जाता फ़िर एक दिन किसी फिल्म के क्लाइमेक्स से प्रभावित होकर आखिर अनीश अलीशा से बोल ही बैठा की डायरेक्टर को इसको ऐसे नहीं उस तरह से खत्म करना चाहिये था।
अलीशा ने भी वक़्त की नज़ाकत देखकर बोला बात तो सही है तुम्हारी लेकिन हीरो को भी अपनी रेस्पॉस्सिबेलिटी का ध्यान रखना चाहिए था वरना क्लाइमेक्स इतना कॉम्प्लिकेटेड  न होता अनीश ने तिरछी नज़रो से अलीशा को देखा,ये वही नज़र थी जब अनीश अलीशा के प्यार में पागल फिरा करता था और इस तरह से न जाने कितने बार अलीशा को देखा था।
आज अलीशा बहुत टाइम बाद चैन से सोयी थी उसे हर तरफ अनीश का चेहरा ही नज़र आ रहा था।
सुबह हो गयी अनीश निकल चुका था कुछ देर बाद अलीशा भी  अपने काम पर निकल गयी।
शाम को जब घर आती है तो देखती है अनीश बेसुध स सो रहा है...ऐसा मालूम हो रहा था जैसे तबियत खराब हो
अलीशा को कुछ समझ न आया उसने आवाज़ लगायी  अनीश अनीश उधर से कुछ जवाब न मिलता देख अलीशा अनीश के नज़दीक गयी  और अनीश उसको अपने पास खींच लिया औऱ बोला तुम्हे क्या लगा मैं तुम्हे भूल गया हूँ या फिर मैं पागल हो गया हूँ अलीशा पहले तो थोड़ा घबराई फिर बोली अनीश तुमने तो मुझे डरा ही दिया ऐसे करता है क्या कोई? 
हम्म काम तो मैंने डराने वाला किया है, अब बताओ क्या सजा दोगी मुझे, तुम्हारी सजा ये है कि आज रात भर तुम मुझसे से बात करोगे अनीश अच्छा जी औऱ फिर मेरी जान को प्यार कौन करेगा अगर मैं रात भर बात करूँगा तो
हम्म ये भी है एक काम करते है आज बात करते है कल प्यार कर लेंगे अनीश नही मुझे आज ही प्यार करना है अलीशा औऱ मुझे आज ही बात करनी है। अनीश अच्छा ठीक चलो आधी आधी रात बाट लेते है ,मैं ये सिक्का उछलता हूँ जो जीता उसकी बारी पहले अनीश जीत गया और फिर  दोनो एक दूसरे के आग़ोश में सोये बहुत सी बातें भी हुई अनीश ने बताया की वो अब नाते रिस्तो से ऊब चुका है उसे कुछ भी नाही भाता कितना वक्त हो गया क्या किसी ने उसकी सुध ली मां औऱ बहन के सिवा यहां तक मेरे पापा  को भी फुर्सत नही है अगर मैं उनका बिज़नेस सम्भलता तो उनका बेटा था वरना नही , दोस्तों ने तो ऐसे मुह फेरा हैं जैसे मैं उनका मांग कर खाता हूँ बस नही थे पैसे नही मन हुआ चिल करने का तो क्या इसका मतलब ये हो गया कि दोस्ती ही खत्म और रिश्तेदार तो ऐसे पूछते है- औऱ क्या काम कर रहे हो जैसे अपने बेटे को आईएस बना दिया हो खुद के बच्चो को तो देखते नही औऱ मेरे पापा से बोलते है आपका लड़का पागल तो नही हो गया फिल्में बनाना भी भला कोई काम है और रही शौक़ की बात तो शौक बुढ़ापे में पूरे किये जाते है जवानी में नहीं।
कभी पूछ कर देखो उनलोगों से जो एक बार अपने सपने औऱ अपने शौक़ को छोड़कर आगे बढ़ते है तो फ़िर क्या मिल पाते है पहले नयी नौकरी का बोझ फिऱ माता पिता द्वारा चुनी गयी संस्कारी बहु के नखरे।
यर अलीशा मैं अपनी लाइफ को टिपिकल नही बनाना चाहता हूँ मैं सिंपल सी औऱ अपनी मर्ज़ी की लाइफ जीना चाहता हूं जहां तुम हो मैं हूँ औऱ हमारा परिवार हो हम एक दूसरे की लाइफ से खुश हो...बस!औऱ कुछ नही चाहिये।
देखना अलीशा एक दिन ये जो मुझसे मुह फेरे खड़े है न एक दिन खड़े होकर मेरे लिये तालियां बाजयेंगे।
ये कहते हुए अनीश की आँखे छलक आयी औऱ वो रोया बहुत रोया उस दिन अलीशा ने उसको नही रोका क्योकि कभी कभी रोने से सारे दुःख बाह जाते हैं औऱ नई किरण के साथ एक नयी शुरुआत होती हैं।
सुबह हो गयी आज 15 अगस्त था इसलिए अखबार बाँटने का काम भी बंद था आज देर से उठा अनीश औऱ उठते ही देखा कि अलीशा उसके पास नही है, टेबल पर एक कॉपी रखी है उसमें कुछ लिखा है-
अलीशा मैं बहुत परेशान थी कि तुम्हे हो क्या गया है लेकिन न जाने क्यों तुमने मुझे इस काबिल भी न समझा कि एक बार तुम अपनी दिक्कत मुझसे सांझा करो लेकिन कल जब हमने एक दूसरे से बहुत देर बात की तो मुझे समझ आया तुम्हारी पहली आज़ादी तुम्हारा शौक़ तुम्हारा कैरियर है मैं तुन्हें किसी भी तरह की बेड़ी में जकड़ा हुआ नही देख सकती मैं तुम्हे तुम्हारे आसमान में उड़ता हुआ देखना चहती हूँ मैं तुम्हारी कमजोरी बनो ऐसी कोई अभिलाषा नही है मेरी तुम अपने आसमान में उड़ने की तैयारी करो देखना जब तुम आसमान में होगे न तब मैं तुम्हारा इंतज़ार कर रही हूँगी औऱ तब तुम आसमान के परिंदे की तरह नीचे आना औऱ मुझे ले जाना... आजादी का शुभ दिन तुम्हे मुबारक हो तुम आज़ाद हो औऱ मैं हर जगह तुम्हारे साथ हूँ जब याद करोगे अपने बड़े से दिल के छोटे से कोने में मुझे पाओगे...चंद लाइनें सिर्फ तुम्हारे लिये-
किसी को आसमान की उचाईयों को छूना तो किसी को समुद्र की गहराइयों को चखना है पर ये हौसले न जाने क्यों इस दुनिया के मतलबी मलबे में दबकर गुम हो जाते है आज औऱ अभी से तुम उनके लिये आशा की किरण बनना औऱ दुनिया को एक नया नज़रिया देना ज़िन्दगी जीने का।।
                                                  - तुम्हारी अलीशा

अनीश की पहली फ़िल्म

अलीशा चली गयी अनीश को इसलिये छोड़ कर की कही वो भटक न जाये अपने रास्ते से औऱ ये वादा भी कर गयी कि मैं मिलूँगी तुमसे वहाँ जहाँ तुम्हारे ख्वाब साकार हो जायेंगे...
अलीशा औऱ अनीश दोनो के लिये ये कठिन वक़्त था पर दोनों ने अपनी अपनी समझ से इस लम्हे को वक़्त के हाथों सौप दिया क्योंकि उन्हें पता था समय का पहिया चलता है दिन ढलता है रात आती है फिर सुबह आती है सब ठीक हो जाता है।
अनीश ने बहुत पहले एक कहानी सोच रखी थी अलीशा जाते जाते नये अनीश को जन्म दे चुकी थी औऱ ये अनीश जोश और उत्साह से लबरेज था।
अनीश आख़िर एक शार्ट फ़िल्म बना ही डाली जो खासा चर्चें में रही फिल्म का बजट 5000 था और फ़िल्म ने अवार्ड शो औऱ प्रीमियर के फंक्शन से 10000 हज़ार की कमाई की अनीश ने के पैसों  से पहले एक छोटा सा प्रोडक्शन हाउस खोला औऱ किराये पर लोगों को फ़िल्म से जुड़े समान उपलब्ध कराने लगा वो एक हाथ से सामना किसी से लेने के पैसे देता औऱ दूसरे हाथ से पैसे लेकर फ़िल्ममेकर्स समान मुहैया कराता....
अब अनीश की आर्थिक हालात पहले से बदल गये तो उसने कुछ और शार्ट फिल्में बनायी कुछ हिट कुछ फ्लॉप अब अनीश ने तये किया कि वह मुम्बई जायेगा औऱ फुल लेंथ फ़िल्म में पहले अस्सिस्टेंट डायरेक्टर का काम करेगा औऱ कुछ पैसे कमा कर अपनी किसी कहानी पर काम करेगा।
तीन साल बीत गये मुंबई में अनीश को बहुत कुछ हुआ बहुत कुछ सहन कर गया अनीश औऱ बहुत से तजुर्बे मिले औऱ आख़िर में अनीश ने वो कर दिखाया जो वो करना चाहता था
आज वो अपने गांव गया जिसको वो 10 साल पहले छोड़ आया था पापा से झगड़ा होने के कारण ।
माँ को फोन पर बता दिया था कि वो गांव आने वाला है ।
दूर से ही माँ ने अनीश को पहचान लिया औऱ अनीश की बहन से कुछ बात करते हुए बोली  देखो तो जरा शूट बूट में अनीश कितना जांच रहा है। अनीश ने मां को गले लगा लिया औऱ बोला देख माँ तू कहती थी न एक दिन तू बहुत बड़ा आदमी बनेगा लो बन गया मैं, हां थोड़ा वक्त ज्यादा ले लिया लेकिन मां मैं ख़ुश हूँ बहुत खुश हूँ की मैने अपने सपनो को, उन हौसलो को पा लिया जिनकी मैं सिर्फ कल्पना ही कर सकता था ।
अनीश की पहली फ़िल्म सफल रही कुछ फ्लॉप रही और कुछ हिट पहके प्रोडक्शन कंपनी फ़िर अस्सिस्टेंट डिरेक्टर औऱ अब डायरेक्टर, एडिटर,सिनेमाटोग्राफ.....सारी विधाओ में महारत हासिल कर ली अनीश ने।
अनीश के इस हौसले से मुझे मेरी लिखी चंद लाइने याद अ गयी-
कहते हैं हौंसलो में उड़ान हो
तो फासलें खुद ब खुद मिट जाते है,
और मजिंल तक पहुँचने की
ललक हो तो रास्ते खुद ब खुद मिल जाते है||
हवाओं को भी रुख बदलना पड़ता हैं
तेरी मेहनत के आगे पाहाडो को भी सर झुकाना पड़ता है|
जब मंज़िल को तू जिन्दगी से ज्यादा
आंकता है,
तो मंज़िल को खुद चलकर तेरे पास आना पड़ता है|
जब तुझे जिन्दगी से प्यार हो जाता है
तो खुशी को भी तेरा दरवाजा खटखटाना पड़ता है|
जब मुसीबत को मंज़िल का साथी
मानकर तू उनके साथ खेलता है
तो मुसीबतो को ही तुझे आगे
मंज़िल की ओर ढकेलना पड़ता है
कहती है "स्वाति" की कलम एक बार
जो तू हुंकार भर उसको अंजाम तक
पाहुँचाये बिना न ठहर||
अनीश ने चींटी की पहाड़ चढ़ने वाली कहानी को साकार करके दिखया औऱ अपनी मेहनत औऱ लगन से अपने सपनो के मुकाम को हासिल कर लिया।
                     - स्वाति
                               की कलम से "हौसले" की एक कहानी
आशा करती हूँ आपको पसंद आयेगी।।
 


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